नैनीताल , सितंबर 17 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) में सहायक अभियंताओं के वरिष्ठता विवाद मामले में महत्वपूर्ण फैसला दिया है।

मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने अपने फैसले में यूपीसीएल द्वारा प्रत्यक्ष भर्ती और पदोन्नत अधिकारियों की वरिष्ठता को नियमानुसार रोटा-कोटा व्यवस्था के आधार पर निर्धारित करने को सही माना और इससे संबंधित याचिकाओं को खारिज कर दिया।

खंडपीठ ने इन याचिकाओं पर बुधवार को फैसला सुनाया लेकिन आदेश की प्रति आज उपलब्ध हो पायी।

मामला सहायक अभियंता के वर्ष 2008-09 के भर्ती प्रकरण से जुड़ा है। उस समय सीधी भर्ती के लिए 50.33 प्रतिशत और पदोन्नति के लिए 49.67 प्रतिशत कोटा निर्धारित था जो व्यावहारिक रूप से एक-एक के अनुपात में था। एक नवंबर 2008 को दोनों स्रोतों के लिए रिक्तियों का निर्धारण किया गया था। सीधी भर्ती के लिए 72 और पदोन्नति कोटे में 53 रिक्तियां चिन्हित की गई थीं।

पदोन्नति प्रक्रिया में नवंबर 2008 में 11 जूनियर इंजीनियरों को पदोन्नति दी गई जबकि पात्र अधिकारियों की संख्या पर्याप्त न होने पर अर्हता अवधि में 50 प्रतिशत की छूट दी गई। इसके बाद 30 जून 2009 को हुई डीपीसी की संस्तुति पर 43 और जूनियर इंजीनियर पदोन्नत हुए। दूसरी ओर, सीधी भर्ती के लिए 26 फरवरी 2009 को 68 सहायक अभियंता (ट्रेनी) पदों के लिए विज्ञापन जारी हुआ। चयन प्रक्रिया में देरी के कारण 39 पद ही भरे जा सके और चयनित सीधी भर्ती अधिकारियों ने दिसंबर 2009 से जनवरी 2010 के बीच कार्यभार ग्रहण किया।

विवाद इस बात को लेकर था कि सीधी भर्ती से बाद में नियुक्त हुए अधिकारियों को 2008-09 के पदोन्नत अधिकारियों के साथ वरिष्ठता सूची में रोटा-कोटा के अनुसार स्थान दिया जाए या उनकी वरिष्ठता नियुक्ति के समय से मानी जाए। पदोन्नत अधिकारियों की ओर से तर्क दिया गया कि सीधी भर्ती अधिकारी अगले भर्ती वर्ष 2009-10 में नियुक्त हुए, इसलिए उन्हें 2008-09 की वरिष्ठता सूची में स्थान नहीं दिया जा सकता।

उच्च न्यायालय ने वरिष्ठता विनियम, 1998 के विनियम 8(3) की व्याख्या करते हुए कहा कि जहां पदोन्नति और सीधी भर्ती दोनों एक ही चयन प्रक्रिया का हिस्सा हों, वहां दोनों स्रोतों से नियुक्त अधिकारियों की वरिष्ठता निर्धारित कोटे के अनुरूप चक्रीय क्रम में तय की जाएगी। अदालत ने माना कि केवल इस वजह से कि सीधी भर्ती की प्रक्रिया प्रशासनिक कारणों से बाद में पूरी हुई, संबंधित अधिकारियों को उस चयन प्रक्रिया में उपलब्ध उनके रोटा-कोटा स्थान से वंचित नहीं किया जा सकता।

अदालत ने विशेष रूप से कहा कि इस मामले में दोनों स्रोतों की रिक्तियां एक नवंबर 2008 को निर्धारित की गई थीं और सीधी भर्ती की प्रक्रिया भी उसी भर्ती प्रक्रिया के तहत शुरू हुई थी। इसलिए यह मामला केवल पिछली रिक्ति के आधार पर पूर्व प्रभाव से वरिष्ठता देने का नहीं, बल्कि एक ही चयन प्रक्रिया से जुड़े दो भर्ती स्रोतों के बीच वरिष्ठता निर्धारण का है।

इससे पहले यूपीसीएल ने उच्च स्तरीय कमेटी गठित की थी। कमेटी ने 17 अप्रैल 2025 की रिपोर्ट में पदोन्नत अधिकारियों को पहले और सीधी भर्ती अधिकारियों को उसके बाद क्रम में रखते हुए संयुक्त चयन सूची बनाने तथा 2009 में नियुक्त सीधी भर्ती अधिकारियों को 2008-09 के पदोन्नत अधिकारियों के साथ 1:1 रोटा-कोटा के आधार पर समायोजित करने की सिफारिश की थी। इसके बाद 4 जून, 2025 को संयुक्त वरिष्ठता सूची जारी की गई थी, जिसमें सीधी भर्ती अधिकारियों को पदोन्नत अधिकारियों के बीच रोटा-कोटा के अनुसार रखा गया।

खंडपीठ ने यूपीसीएल द्वारा तैयार वरिष्ठता व्यवस्था में कोई त्रुटि नहीं पाई।

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