लखनऊ , सितंबर 06 -- उत्तर प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं और गंभीर चिकित्सकीय आपात स्थितियों में समय पर उपचार उपलब्ध कराने के लिए योगी सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को एकीकृत आपात नेटवर्क से जोड़ने की तैयारी कर रही है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर उत्तर प्रदेश ट्रॉमा एंड इमरजेंसी नेटवर्क (यूपीटीईएन) विकसित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य दुर्घटना या गंभीर बीमारी के बाद शुरुआती 60 मिनट यानी 'गोल्डन ऑवर' में मरीज को उचित उपचार उपलब्ध कराना है।

यूपीटीईएन के तहत प्रदेश की ट्रॉमा, बर्न, हृदयाघात, स्ट्रोक और अन्य आपात सेवाओं को एक नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। योजना में 173 एकीकृत ट्रॉमा एवं इमरजेंसी मेडिसिन इकाइयां विकसित करने का लक्ष्य है। इनमें 11 लेवल-1 एपेक्स हब, 36 लेवल-2 क्षेत्रीय केंद्र और 126 लेवल-3 जिला स्तरीय इकाइयां शामिल होंगी।

अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य अमित घोष ने बताया कि इस व्यवस्था के जरिए हर साल 10 से 12 हजार लोगों की जान बचाने का लक्ष्य रखा गया है।

उन्होंने बताया कि योजना के तहत 1,200 उन्नत जीवन रक्षक एंबुलेंस को नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। प्रदेश के 18 मंडलीय कमांड सेंटर आपात कॉल, एंबुलेंस, अस्पतालों में उपलब्ध बिस्तरों और विशेषज्ञ चिकित्सकीय सेवाओं के बीच समन्वय स्थापित करेंगे।

श्री घोष के अनुसार आपातकालीन प्रतिक्रिया समय में 30 से 50 प्रतिशत तक कमी लाने का लक्ष्य है। वास्तविक समय पर सूचना साझा करने, डिजिटल चेतावनी प्रणाली और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित मरीज की गंभीरता तय करने वाली तकनीक के इस्तेमाल का प्रस्ताव है।

योजना के तहत आम नागरिकों को भी प्राथमिक आपात सहायता का प्रशिक्षण देकर प्रथम मददगार नेटवर्क में शामिल किया जाएगा। इसके अलावा सभी नागरिकों के लिए 48 घंटे तक मुफ्त आपातकालीन उपचार की व्यवस्था प्रस्तावित है।

यूपीटीईएन के लिए अलग बजट, मानव संसाधन नीति, इमरजेंसी मेडिसिन ऑफिसर संवर्ग, विशेषज्ञ चिकित्सकों के लिए प्रोत्साहन और एम्स के अनुरूप वेतनमान जैसे प्रावधान भी प्रस्तावित हैं।

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