लखनऊ , सितंबर 18 -- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी -मार्क्सवादी-लेनिनवादी (भाकपा-माले) ने दो हजार रुपये से अधिक की खरीदारी पर यूपीआई भुगतान पर शुल्क लगाए जाने के कथित केंद्र सरकार के फैसले का विरोध किया है। पार्टी ने इसे आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने वाला फैसला बताते हुए तत्काल वापस लेने की मांग की है।

भाकपा (माले) के राज्य सचिव सुधाकर यादव ने शुक्रवार को कहा कि सरकार की ओर से शुल्क को लेकर जो तर्क दिया जा रहा है, उसकी वास्तविकता अलग है। उन्होंने कहा कि दो हजार रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर लगने वाला मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) व्यापारी से वसूले जाने की बात कही जा रही है लेकिन व्यापारी इस अतिरिक्त लागत को अंततः वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में शामिल कर सकते हैं। इससे उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ने और महंगाई बढ़ने की आशंका है।

उन्होंने कहा कि यूपीआई भुगतान पर लगने वाले शुल्क को एमडीआर यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट कहा जा रहा है। उनका सवाल था कि जब भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जा रहा है तो उसे डिस्काउंट रेट क्यों कहा जा रहा है।

श्री यादव ने आरोप लगाया कि नोटबंदी के बाद आम लोगों को डिजिटल भुगतान की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया गया और अब यूपीआई भुगतान पर शुल्क लगाने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने इसे आम जनता के हितों के विपरीत बताया।

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