कलना , जुलाई 12 -- पश्चिम बंगाल में संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) से जुड़ी एक एजेंसी के प्रतिनिधिमंडल के दौरे के बाद पूर्वी बर्दवान के एक छोटे से गांव नतुनग्राम में लकड़ी की गुड़िया बनाने का इकलौता उद्योग अब वैश्विक स्तर पर पहचान बनाने के लिए तैयार है।

उल्लेखनीय है कि कलना के नतुनग्राम में लकड़ी की गुड़िया बनाने वाले केंद्र को हाल ही में 'भौगोलिक संकेत' (जीआई) का टैग मिला है। प्रतिनिधिमंडल ने कल नतुनग्राम पहुंचते ही लकड़ी की गुड़िया बनाने की कला के गढ़ को करीब से समझने के लिए घर-घर जाकर जानकारी ली। अधिकारियों ने कारीगरों से बातचीत करते हुए गुड़िया बनाने की प्रक्रिया को देखते हुए उसका वीडियो बनाया। उन्होंने बनाने के तरीकों की समीक्षा भी की।

नतुनग्राम लकड़ी नक्काशी कारीगर औद्योगिक सहकारी समिति के सचिव दिलीप सूत्रधार ने कहा, "जीआई टैग मिलने और फिर यूनेस्को एजेंसी के अधिकारियों के दौरे से हमने बड़े सपने देखने शुरू किए हैं। इससे हमारे कारीगरों में नयी ऊर्जा और बहुत हिम्मत आएगी।"दौरे पर आए विशेषज्ञों ने कहा कि हाल ही में मिले जीआई टैग से नतुनग्राम के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी कला के नये रास्ते खोजने की काफी संभावनाएं पैदा हुई हैं। यूनेस्को से जुड़ी एजेंसी के वरिष्ठ प्रतिनिधि राजर्षि दास ने कहा, "हम यहां इस अनोखी कला की वैश्विक बाजार को तेजी देने में मदद करने आए हैं, जिससे यहां संघर्ष कर रहे कारीगरों को बेहतर आर्थिक मौके मिल सकें।"गौरतलब है कि नतुनग्राम पुरबास्थली (उत्तर) विधानसभा क्षेत्र में आता है। स्थानीय विधायक गोपाल चटर्जी जीआई टैग और यूनेस्को से जुड़े प्रतिनिधिमंडल के दौरे को लेकर काफी उत्साहित हैं। उन्होंने कहा, "कारीगरों ने सालों तक बहुत मुश्किलों का सामना किया है और अब नयी सरकार के आने के बाद हमने इस अनोखी कला के लिए हरसंभव मदद और सहयोग देने की योजना बनाई है।"अंतरराष्ट्रीय बाजार अनुसंधान से पता चला है कि लकड़ी की गुड़िया का उद्योग तेजी से टिकाऊ और बिना जहरीले तत्वों वाले खिलौनों की ओर बढ़ रहा है। अरबों डॉलर के इस उद्योग में गुड़िया का हिस्सा 4.2 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) के हिसाब से बढ़ रहा है, जिसे उत्तरी अमेरिका और एशिया-प्रशांत में बढ़ते मध्यम वर्ग से बढ़ावा मिल रहा है। इसके अलावा जापान और रूस इस क्षेत्र में दो बड़े प्रतिद्वंद्वी हैं, जापान की बेलनाकार 'कोकेशी' गुड़िया (जिनमें हाथ-पैर नहीं होते) और रूस का 'मात्र्योश्का' लकड़ी की गुड़ियों का सेट (जिसमें एक के अंदर एक घटते आकार की गुड़िया होती हैं) मशहूर हैं।

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