भोपाल , अगस्त 25 -- भोपाल यूनियन कार्बाइड गैस दुर्घटना से जुड़े आपराधिक मामले की सुनवाई मंगलवार को भोपाल जिला न्यायालय में जेएमएफसी हेमलता अहिरवार की अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान मुख्य मुद्दा द डाव केमिकल कंपनी (टीडीसीसी-यूएसए), जो वर्तमान में यूनियन कार्बाइड कॉर्पोरेशन (यूसीसी) की मालिक है, पर भारतीय अदालतों के अधिकार क्षेत्र से संबंधित रहा।

अभियोजन पक्ष की ओर से केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने दलील दी कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 177 के अनुसार प्रत्येक अपराध की जांच और सुनवाई सामान्यतः उसी अदालत में होती है, जिसके स्थानीय अधिकार क्षेत्र में अपराध घटित हुआ हो। चूंकि यूनियन कार्बाइड गैस दुर्घटना भोपाल में हुई थी, इसलिए मामले पर भोपाल अदालत का अधिकार क्षेत्र है।

सीबीआई ने कहा कि भारतीय आपराधिक न्याय व्यवस्था में अधिकार क्षेत्र का निर्धारण अपराध घटित होने के स्थान से होता है, आरोपी के निवास स्थान से नहीं। एजेंसी ने अक्टूबर 2012 में मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा टीडीसीसी-यूएसए को जारी नोटिस और अधिकार क्षेत्र के संबंध में की गई टिप्पणी का भी हवाला दिया।

सीबीआई के अनुसार उच्च न्यायालय ने कहा था कि टीडीसीसी-यूएसए यूसीसी की प्रतिनिधि है या नहीं, यह प्रश्न विचारण न्यायालय द्वारा दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 305(6) के तहत तय किया जाना अभी शेष है। इस प्रावधान के तहत किसी निगम की ओर से अदालत के समक्ष उपस्थित व्यक्ति के अधिकृत प्रतिनिधि होने पर उठने वाले प्रश्न का निर्धारण संबंधित न्यायालय करता है।

सीबीआई ने यह भी बताया कि विदेश में समन अथवा नोटिस की तामील से संबंधित निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किया गया। भोपाल जिला न्यायालय द्वारा जारी नोटिस गृह मंत्रालय के निर्धारित माध्यम से भेजा गया और अमेरिकी न्याय विभाग ने इसे टीडीसीसी को तामील कराया। सीबीआई ने कहा कि अमेरिकी न्याय विभाग की ओर से नोटिस की तामील के दौरान अधिकार क्षेत्र को लेकर कोई आपत्ति नहीं जताई गई।

सीबीआई द्वारा अधिकार क्षेत्र के संबंध में अपनी दलीलें पूरी किए जाने के बाद मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर को होगी। इस दिन अभियोजन पक्ष की सहायता कर रहे भोपाल ग्रुप फॉर इंफॉर्मेशन एंड एक्शन (बीजीआईए) की ओर से डाव केमिकल की आपराधिक जवाबदेही और अधिकार क्षेत्र से संबंधित दलीलें एवं फाइलिंग प्रस्तुत की जाएगी।

सीबीआई की ओर से लोक अभियोजक अभिनव कृष्णा और अन्वेषण अधिकारी गौरव सोम तथा बीजीआईए की ओर से रचना ढींगरा उपस्थित रहीं। टीडीसीसी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रवींद्र श्रीवास्तव ने पैरवी की।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित