भोपाल , जुलाई 31 -- भोपाल गैस त्रासदी से प्रभावित लोगों के चार संगठनों ने दावा किया है कि यूनियन कार्बाइड के परित्यक्त कारखाने के आसपास के क्षेत्रों में पेयजल के लगभग 70 प्रतिशत नमूने मल से दूषित पाए गए हैं। संगठनों ने आरोप लगाया कि भोपाल नगर निगम इन इलाकों में सीवेज से दूषित पानी की आपूर्ति कर रहा है, जिससे इंदौर के भागीरथपुरा जैसी स्थिति उत्पन्न होने की आशंका है।

संयुक्त पत्रकार वार्ता में भोपाल गैस पीड़ित महिला पुरुष संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष नवाब खान ने बताया कि जुलाई माह में 30 समुदायों के नलों से 63 पानी के नमूने लिए गए, जिनमें से 43 में फीकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की पुष्टि हुई। उनके अनुसार 30 में से 19 समुदायों को उपलब्ध कराया जा रहा पेयजल मल से दूषित पाया गया। उन्होंने दावा किया कि अपर लेक (बड़ा तालाब) से आपूर्ति किए गए पानी के 90 प्रतिशत तथा कोलार डैम से आपूर्ति किए गए पानी के 25 प्रतिशत नमूने दूषित मिले।

भोपाल गैस पीड़ित महिला स्टेशनरी कर्मचारी संघ की अध्यक्ष रशीदा बी ने आरोप लगाया कि प्रभावित क्षेत्रों के लोग दूषित पानी पीने के कारण दस्त, उल्टी तथा जलजनित बीमारियों का सामना कर रहे हैं और निजी क्लीनिकों में टाइफाइड के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2004 में उच्चतम न्यायालय ने क्षेत्र में जहरीले रसायनों और भारी धातुओं से प्रदूषित भूजल से लोगों की सुरक्षा के लिए पाइपलाइन के माध्यम से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे।

भोपाल गैस पीड़ित निराश्रित पेंशनभोगी संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष बालकृष्ण नामदेव ने कहा कि वर्ष 2018 में उच्चतम न्यायालय ने क्षेत्र में सीवेज लाइन और समुचित ड्रेनेज व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए थे। उनका आरोप है कि नगर निगम ने तीन माह में कार्य पूरा करने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक इस दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।

भोपाल ग्रुप फॉर इंफॉर्मेशन एंड एक्शन की रचना धींगरा ने कथित रूप से दूषित पेयजल आपूर्ति के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में सीवेज और ड्रेनेज योजना का समयबद्ध क्रियान्वयन तथा पेयजल की गुणवत्ता की स्वतंत्र निगरानी की व्यवस्था तत्काल की जानी चाहिए। नगर निगम अथवा प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी है।

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