नयी दिल्ली , जून 27 -- मणिपुर की 21 नागा जनजातियों का प्रतिनिधित्व करने वाले शीर्ष संगठन 'यूनाइटेड नागा काउंसिल' ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार से मणिपुर की बिगड़ती स्थिति, विशेष रूप से नागा बहुल क्षेत्रों में देखते हुए तुरंत हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है।
इसके साथ ही संगठन ने कथित तौर पर अपहरण और हत्या के शिकार हुए छह नागा नागरिकों के लिए न्याय की मांग की है।
यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए संगठन ने कहा कि उसने नागा महिला संघ और ऑल नागा स्टूडेंट्स एसोसिएशन (मणिपुर) के साथ मिलकर प्रधानमंत्री को एक संयुक्त ज्ञापन सौंपा है। प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि नागा क्षेत्रों को म्यांमार के सशस्त्र लड़ाकों और अभियान निलंबन समझौते के तहत सक्रिय कुकी उग्रवादी समूहों के हमलों का सामना करना पड़ रहा है, जो नागा शांति प्रक्रिया और देश की पूर्वी सीमा दोनों के लिए एक गंभीर खतरा पैदा कर रहा है।
संगठन का आरोप है कि 13 मई को चर्च के तीन नेताओं की हत्या के बाद, कुकी उग्रवादी समूहों ने लेइलोन वाइफेई और सपेरमैना गांवों से बीस नागा नागरिकों का अपहरण कर लिया गया था। हालांकि चौदह बंधकों को पंद्रह मई को रिहा कर दिया गया था, लेकिन अधिकारियों से बार-बार की गई अपीलों के बावजूद शेष छह नागरिकों के क्षत-विक्षत शव दस जून को बरामद हो सके।
परिषद ने इन हत्याओं की समयबद्ध, स्वतंत्र और अदालत की निगरानी में जांच कराने की मांग की है और कथित तौर पर संलिप्त लोगों की तत्काल गिरफ्तारी और उन पर मुकदमा चलाने की गुहार लगाई है। इसने नागा बहुल क्षेत्रों के लिए सुरक्षा गारंटी की भी मांग की और केंद्र से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि नागाओं की पैतृक भूमि किसी भी प्रस्तावित प्रशासनिक या क्षेत्रीय परिवर्तनों से सुरक्षित रहे।
संगठन ने आगे मांग की कि कुकी नेशनल फ्रंट-प्रेसिडेंट समूह को एक आतंकवादी संगठन घोषित किया जाए। इसके साथ ही उसने कुकी उग्रवादी समूहों के साथ हुए अभियान निलंबन समझौते को रद्द करने की मांग की और इसके जमीनी नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया।
अपनी अन्य मांगों में, परिषद ने हत्याओं से कथित रूप से जुड़े व्यक्तियों और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने, राष्ट्रीय राजमार्गों को सुचारू रूप से बहाल करने, सात मई को नागा गांवों पर हुए हमलों की न्यायिक जांच कराने और तीन अगस्त 2015 के रूपरेखा समझौते के तहत एक सम्मानजनक और समावेशी भारत-नागा राजनीतिक समाधान को तेजी से लागू करने का आह्वान किया।
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