भिण्ड , जनवरी 28 -- मध्यप्रदेश के भिण्ड में केंद्र सरकार द्वारा लाए गए यूजीसी कानून के विरोध में बुधवार को सवर्ण समाज का आक्रोश सड़कों पर नजर आया। बड़ी संख्या में युवक और बुजुर्ग एकत्र होकर रैली के रूप में कलेक्ट्रेट पहुंचे। प्रदर्शन के दौरान अर्धनग्न प्रदर्शन, कलेक्ट्रेट परिसर में हंगामा, गेट का कांच टूटना और एक युवक की गिरफ्तारी को लेकर पुलिस से तीखी नोकझोंक जैसी घटनाएं सामने आईं। करीब तीन घंटे तक चले इस आंदोलन से शहर में तनावपूर्ण माहौल बना रहा।

सवर्ण समाज के लोग धनमंतरी कॉम्प्लेक्स पर एकत्र हुए, जहां से नारेबाजी करते हुए रैली के रूप में कलेक्ट्रेट की ओर बढ़े। रैली के दौरान युवाओं ने यूजीसी कानून को काला कानून बताते हुए विरोध जताया। कुछ युवकों ने अर्धनग्न होकर प्रदर्शन किया, जिससे शहर में गहमागहमी बढ़ गई।

कलेक्ट्रेट पहुंचने पर पुलिस ने बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया, लेकिन आंदोलनकारियों ने बैरिकेड हटाकर परिसर में प्रवेश कर लिया। काफी देर तक ज्ञापन लेने कोई अधिकारी बाहर नहीं आया, जिससे आक्रोश और बढ़ गया। इसके बाद कुछ युवक कलेक्टर चेंबर की ओर बढ़े। गेट की चैनल खोलने के प्रयास में अंदर से लॉक होने के कारण धक्का-मुक्की हुई और कलेक्ट्रेट गेट का कांच टूटकर जमीन पर गिर गया। पुलिस बल ने तत्काल स्थिति संभालते हुए प्रदर्शनकारियों को पीछे हटाया।

इसी दौरान पुलिस ने आंदोलन में शामिल गौरव दीक्षित बाबा को हिरासत में लेकर थाने ले जाने की कार्रवाई की। यह सूचना फैलते ही प्रदर्शनकारियों का आक्रोश भड़क उठा। उन्होंने पुलिस को घेर लिया और जेल भरो आंदोलन की मांग करते हुए धरने पर बैठ गए। हालात बिगड़ते देख करीब आधे घंटे बाद पुलिस को कदम पीछे खींचने पड़े और गौरव दीक्षित बाबा को मौके पर ही छोड़ दिया गया।

गौरव दीक्षित बाबा ने आरोप लगाया कि उन्हें एक स्थानीय नेता के इशारे पर पकड़ा गया और उनके खिलाफ पहले भी कथित तौर पर फर्जी मामला दर्ज कराया गया था। उन्होंने बताया कि इस संबंध में उन्होंने पहले ही भिण्ड पुलिस अधीक्षक से शिकायत की थी, जिस पर निष्पक्ष जांच का आश्वासन मिला था।

गिरफ्तारी वापस होने के बाद आंदोलनकारियों ने एसडीएम और सीएसपी की मौजूदगी में ज्ञापन सौंपा। यूजीसी कानून के विरोध में यह आंदोलन करीब तीन घंटे तक चला। इस दौरान केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारेबाजी की गई। परशुराम सेना के जिला पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि यूजीसी कानून वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

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