जौनपुर , मार्च 22 -- उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, पत्रकार संगठनों और अधिवक्ताओं ने दिल्ली में यूएनआई के कार्यालय को बिना पूर्व नोटिस के पुलिस द्वारा जबरन खाली कराए जाने की घटना की कड़े शब्दों में निंदा की है और इसे लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा बताया है।

कांग्रेस कमेटी के जिलाध्यक्ष डॉ. प्रमोद कुमार सिंह ने रविवार को कहा कि देश की प्रतिष्ठित समाचार एजेंसी के कार्यालय को अचानक भारी पुलिस बल के साथ खाली कराना अत्यंत निंदनीय है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना नोटिस पत्रकारों और कर्मचारियों को जबरन बाहर निकालना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

दीवानी न्यायालय अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष सुभाष चंद्र यादव ने कहा कि यदि कोई प्रशासनिक आदेश था तो नियमानुसार समय दिया जाना चाहिए था, ताकि संबंधित पक्ष न्यायालय में अपील कर सके। उन्होंने इस कार्रवाई को अनुचित बताया।

समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष राकेश मौर्य ने घटना की तुलना अंग्रेजी शासन से करते हुए इसकी कड़ी निंदा की और राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री से मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष संजय अस्थाना तथा जौनपुर पत्रकार संघ के अध्यक्ष शशि मोहन सिंह क्षेम ने भी घटना को लोकतंत्र के लिए चिंताजनक बताते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

गौरतलब है कि दिल्ली के संसद मार्ग स्थित 9 रफी मार्ग परिसर में कई दशकों से यूएनआई का कार्यालय संचालित हो रहा था। दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा शहरी विकास मंत्रालय के आवंटन रद्द करने संबंधी मामले में निर्णय आने के कुछ ही घंटों बाद कथित तौर पर बिना पूर्व सूचना के पुलिस और अर्धसैनिक बलों के साथ अधिकारियों ने परिसर खाली कराया। उस समय न्यूजरूम में कार्यरत पत्रकारों और कर्मचारियों को तत्काल बाहर जाने के लिए कहा गया, जिससे कार्य प्रभावित हुआ।

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