नयी दिल्ली , मई 16 -- संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने ईरान के उन आरोपों को साफ तौर पर खारिज कर दिया, जिसमें ईरान ने अमेरिकी हमलों के दौरान सीधे तौर पर हमले में शामिल होने का आरोप लगाया था।

नयी दिल्ली में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका (ब्रिक्स) के विदेश मंत्रियों की बैठक में यूएई के राज्य मंत्री खलीफा शाहीन अल मरार ने कहा कि इस तरह के आरोपों के साथ ही दबाव या गलत जानकारी की कोशिशों का देश के सिद्धांतों पर बनी विदेश नीति पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

उन्होंने जोर देकर कहा कि यूएई अपनी संप्रभुता, राष्ट्रीय सुरक्षा और स्वतंत्र फैसले लेने को प्रतिबद्ध है और किसी भी दुश्मनी भरे काम का जवाब देने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सभी अधिकार रखता है। संयुक्त अरब अमीरात ने अपनी संप्रभुता, राष्ट्रीय सुरक्षा या स्वतंत्र फैसले लेने को लक्षित करने वाले किसी भी आरोप या धमकी को साफ तौर पर खारिज कर दिया है और कहा है कि वह "किसी भी धमकी, आरोप या दुश्मनी भरे काम का जवाब देने के लिए अपने पूरे संप्रभु, कानूनी, कूटनीतिक और सैन्य अधिकार सुरक्षित रखता है।"उन्होंने जोर देकर कहा कि 'जबरदस्ती करने, आरोप लगाने या गलत दावों को बढ़ावा देने की कोशिशें यूएई के उसूलों को कमजोर नहीं करेंगी।' उन्होंने पक्का किया कि देश अपने सबसे बड़े राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना जारी रखेगा। श्री अल मारार ने बताया कि 28 फरवरी 2026 से यूएई पर बार-बार हमले हुए हैं, जिनका जिम्मेदार ईरान है। उन्होंने कहा कि यूएई की वायु रक्षा ने 'बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों और ड्रोन से जुड़े लगभग 3,000 हमलों' को रोका है, जिनमें हवाई अड्डों, बंदरगाहों, तेल की जगहें, विलवणीकरण यंत्र, ऊर्जा नेटवर्क, सेवा और रहने की जगहें समेत नागरिक जगहों और जरूरी ढ़ांचों को लक्ष्य किया गया था।

उन्होंने कहा कि कई अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय आलोचनाओं के बावजूद ईरान ने अपनी हरकतें जारी रखी हैं। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का प्रस्ताव 2817 (2026) और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के द्वारा पास किए गए एक संकल्प का जिक्र किया, जिसके बारे में उन्होंने कहा कि यह 'इन हमलों को खारिज करने वाली एक साफ अंतरराष्ट्रीय आम सहमति' दिखाता है।

यूएई ने समुद्री सुरक्षा के बाबत ईरान पर खास समुद्री रास्तों में रुकावट डालने का भी आरोप लगाया और चेतावनी दी कि होर्मुज जलडमरूमध्य में दखल देना समुद्री डकैती है और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा है।

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