जगदलपुर , सितंबर 23 -- छत्तीसगढ में बस्तर के दूरस्थ वनांचलों में जनभागीदारी और सामुदायिक विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू किए गए 'युवोदय' अभियान ने बुधवार को अपने छह वर्ष पूरे कर लिए। वर्ष 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान शुरू हुई यह पहल अब स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, जल संवर्धन, खेल और आजीविका सहित विभिन्न क्षेत्रों में युवाओं की भागीदारी का माध्यम बन गई है।

जिला प्रशासन के अनुसार बस्तर जिला प्रशासन और यूनिसेफ के संयुक्त तत्वावधान में 23 सितंबर 2020 को युवोदय अभियान की शुरुआत की गई थी। शुरुआती दौर में करीब छह हजार युवाओं का नेटवर्क तैयार किया गया। इन स्वयंसेवकों ने कोविड महामारी के दौरान लोगों को जागरूक करने, टीकाकरण को प्रोत्साहित करने और दूरस्थ क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने में सहयोग किया।

अभियान के विस्तार के साथ स्वयंसेवकों को स्वास्थ्य और शिक्षा के अलावा पोषण, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, जल संवर्धन, खेल तथा आजीविका से जुड़े कार्यक्रमों में भी शामिल किया गया। प्रशासन का कहना है कि स्थानीय युवाओं की भागीदारी से गांवों की समस्याओं की पहचान और उनके समाधान में समुदाय की भूमिका बढ़ी है।

छह वर्षों के अनुभव के आधार पर अभियान को अब 'युवोदय 2.0' के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। इसके तहत युवाओं को अपने गांवों की स्थानीय समस्याओं की पहचान कर परिस्थितियों के अनुरूप व्यावहारिक समाधान विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। साथ ही उनके मानसिक स्वास्थ्य, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता के विकास पर भी ध्यान दिया जा रहा है। वर्तमान में बकावंड, बास्तानार, तोकापाल और जगदलपुर विकासखंड के दूरस्थ क्षेत्रों में अभियान के स्वयंसेवक विभिन्न सामुदायिक गतिविधियों में सक्रिय हैं।

जगदलपुर विकासखंड के स्वयंसेवक बनमाली ने कहा कि युवोदय से जुड़ने के बाद वे समस्याओं के केवल दर्शक रहने के बजाय उनके समाधान की प्रक्रिया का हिस्सा बने हैं। स्वयंसेवक हेमबती के मुताबिक अभियान से जुड़ने के बाद उनमें आत्मविश्वास बढ़ा है और अब वे महिलाओं तथा युवाओं से जुड़े मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रख पाती हैं।

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