नयी दिल्ली , जनवरी 13 -- दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने मंगलवार को कहा कि युवा शक्ति तभी राष्ट्र शक्ति बनती है जब युवा मानसिक रूप से सुदृढ़ हों, भावनात्मक रूप से सशक्त हों और नशे से मुक्त हों।

श्री सूद ने आज यहाँ दिल्ली विश्वविद्यालय में नशामुक्त परिसर अभियान के अवसर पर कहा , "यह केवल एक कार्यक्रम की शुरुआत नहीं है, बल्कि यह दिल्ली विश्वविद्यालय के गौरवशाली इतिहास के एक नए अध्याय का शुभारंभ भी है। इसी विश्वविद्यालय की गलियों से निकलकर मैं आज आपके बीच खड़ा हूँ। इसलिए आज मैं यहाँ एक मंत्री के रूप में नहीं, बल्कि दिल्ली विश्वविद्यालय के एक पूर्व छात्र के रूप में, आपके साथी की तरह आपसे संवाद करना चाहता हूँ।"उन्होंने कहा कि कल ही राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया गया है।उन्होंने कहा कि युवा शक्ति तभी राष्ट्र शक्ति बनती है जब युवा मानसिक रूप से सुदृढ़ हों, भावनात्मक रूप से सशक्त हों और नशे से मुक्त हों। उन्होंने कहा कि यह केवल किसी अभियान का लॉन्च नहीं है, बल्कि यह एक राष्ट्रीय संकल्प है। भारत अब नशे को "यूथ कल्चर" के नाम पर रोमांटिसाइज़ नहीं होने देगा।वर्षों तक समाज ने इस सच्चाई से आँखें मूँदे रखीं। कभी नशे को "पर्सनल चॉइस" कहा गया, तो कभी "अर्बन कल्चर" का नाम दिया गया। लेकिन आज हमें स्पष्ट होना होगा की नशा कोई चॉइस नहीं है यह एक ट्रैप है। यह ट्रैप सबसे पहले छात्र की स्पष्ट सोच और अनुशासन को तोड़ता है।

उन्होंने कहा कि जब कोई छात्र नशे की गिरफ्त में आता है, तो केवल उसका स्वास्थ्य ही नहीं गिरता, बल्कि उसके माता-पिता के सपने, उनका संकल्प और राष्ट्र की प्रगति भी बाधित हो जाती है। असली नुकसान उस पोटेंशियल का है, जो इस देश को विकसित भारत और दिल्ली को विकसित भारत की विकसित राजधानी बनाने में लगना था।

शिक्षा मंत्री ने कहा , "आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पूरा देश नशा-मुक्त भारत अभियान को एक जन-आंदोलन बना रहा है। उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान बार-बार इस बात पर ज़ोर देते रहे हैं कि हमारे कैंपस केवल डिग्री बाँटने के केंद्र नहीं हैं, बल्कि वे चरित्र निर्माण के मंदिर हैं।आज हमारे बीच उपस्थित उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन के लिए नशा-मुक्त भारत का संकल्प नया नहीं है।"श्री सूद ने कहा कि दशकों पहले, सार्वजनिक जीवन में रहते हुए, उन्होंने 19,000 किलोमीटर की ऐतिहासिक रथयात्रा निकाली थी, जिसके प्रमुख उद्देश्यों में से एक था नशीली दवाओं के खतरे के प्रति समाज को जागरूक करना। उनके लिए यह अभियान केवल कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक मिशन है। आज उनकी उपस्थिति हम सभी के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के नेतृत्व में नशा-मुक्ति अभियान आज एक सशक्त जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। उनका स्पष्ट विश्वास है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से हम ऐसी पीढ़ी तैयार कर रहे हैं जो जॉब सीकर नहीं, बल्कि जॉब क्रिएटर बने और नशे की इस अंधेरी दुनिया में जिसकी कोई जगह न हो।

उन्होंने कहा कि आज जो नशा-मुक्त परिसर पोर्टल और मोबाइल ऐप लॉन्च किया जा रहा है, वह तकनीक और संकल्प का अद्भुत संगम है। यह ऐप उन छात्रों के लिए एक सुरक्षित मंच बनेगा, जो मदद तो चाहते हैं, लेकिन झिझक के कारण सामने नहीं आ पाते। मेंटल हेल्थ सपोर्ट आज सबसे सशक्त प्रिवेंशन टूल है, और मुझे गर्व है कि देश का नेतृत्व, प्रशासन और शैक्षणिक संस्थान इसे छात्रों की उँगलियों तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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