नयी दिल्ली , अप्रैल 30 -- ) वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) के सचिव एम. नागराजू ने सार्वजनिक क्षेत्र की साधारण बीमा कंपनियों को युवा पीढ़ी की जरूरत और भविष्य में उभरते जोखिमों के मद्देनजर नये-नये बीमा पॉलिसी उत्पाद लाने की सलाह दी है। उन्होंने कंपनियों को अपना डिजिटल प्रौद्योगिकी का ढांचा मजबूत बनाने का भी सुझाव दिया है।
श्री नागराजू ने बुधवार को राजधानी में सार्वजनिक क्षेत्र की साधारण बीमा कंपनियों की बैठक की अध्यक्षता की । इस बैठक में चार बीमा कंपनियों-न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (एनआईएसीएल), नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (एनआईसीएल), यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (यूआईआईसीएल) और एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड (एआईसीआईएल)-के विज़न रणनीति दस्तावेजों की व्यापक समीक्षा की गई।
इस बैठक में संजय लोहिया (विशेष सचिव, डीएफएस), डॉ. देबाशीष प्रुस्टी (अपर सचिव, डीएफएस), गिरिजा सुब्रमणियन, सीएमडी, एनआईएसीएल, राजेश्वरी सिंह मुनी, सीएमडी, एनआईसीएल, बी.एस. राहुल, सीएमडी, यूआईआईसीएल, डॉ. लावण्या आर. मुंडायूर, सीएमडी, एआईसीआईएल तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
वित्त मंत्रालय की ओर से जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार बैठक के दौरान मध्यम अवधि (तीन वर्ष) और दीर्घावधि (पाँच वर्ष) दोनों दृष्टिकोणों सहित विज़न रणनीति दस्तावेजों की समीक्षा की गई। डीएफएस के सचिव ने परिचालन दक्षता बढ़ाने, वित्तीय सुदृढ़ता को मजबूत करने, सतत विकास को बढ़ावा देने, मानव संसाधन और आईटी रणनीतियों को परिष्कृत करने तथा सेवाओं की डिलिवरी में सुधार लाने के उद्देश्य से रणनीतिक मार्गदर्शन प्रदान किया।
बैठक के दौरान वित्तीय सेवा सचिव ने इस बात पर जोर दिया कि पीएसआईसी को निवेश के अवसर बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए और साथ ही नुकसान के अनुपात को कम करने के लिए रणनीतियाँ तैयार करनी चाहिए। साथ ही, उन्हें बाजार हिस्सेदारी बनाए रखते हुए अपने खुदरा पोर्टफोलियो और ग्रामीण तथा अर्ध-शहरी क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति को लगातार मजबूत करना चाहिए।
उन्होंने युवा पीढ़ी की आवश्यकताओं को पूरा करने तथा उभरते जोखिमों के लिए कवरेज प्रदान करने हेतु नए और नवोन्मेषी, अनुकूलित उत्पाद विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही तकनीक को अपनाने तथा प्रक्रियाओं के पूर्ण डिजिटलकरण की दिशा में कदम बढ़ाने पर भी बल दिया गया।
विचार-विमर्श के दौरान, अन्य बातों के साथ-साथ, निर्धारित साइबर सुरक्षा ढाँचे का पालन करते हुए डिजिटल और तकनीकी क्षमताओं के विस्तार, डिजिटल नवाचारों को अपनाने तथा ऑनलाइन प्लेटफार्मों के माध्यम से बीमा सेवाओं के विस्तार पर ध्यान केंद्रित किया गया। साथ ही, जनता की शिकायतों के समयबद्ध समाधान और दावों के सुचारु एवं त्वरित निपटान को सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया, ताकि ग्राहकों को प्रभावी सेवाएं प्रदान की जा सकें।
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