, Oct. 3 -- अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के संगठन सचिव बालमुकुंद पांडेय ने कहा कि इतिहास किसी राष्ट्र की केवल अतीत कथा नहीं, बल्कि उसकी सामूहिक स्मृति, सांस्कृतिक चेतना और भविष्य की दिशा का आधार है। युवा इतिहासकारों को प्रमाणों के आधार पर स्थापित ऐतिहासिक धारणाओं का पुनर्परीक्षण करना चाहिए।

अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रोफेसर ईश्वर शरण विश्वकर्मा ने कहा कि संगोष्ठी का उद्देश्य भारतीय दृष्टि से इतिहास लेखन को प्रोत्साहित करना और नए ऐतिहासिक तथ्यों पर विमर्श करना है।

युवा इतिहासकार प्रमुख प्रोफेसर विकास सिंह ने बताया कि अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना 53 वर्षों से प्रामाणिक इतिहास लेखन के क्षेत्र में कार्य कर रही है। संगोष्ठी में 300 शोध-पत्र प्राप्त हुए हैं और कुल 16 सत्रों का आयोजन किया जाएगा।

दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर के.एन. सिंह ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को कक्षा और परिसर से समुदाय तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया।

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