नयी दिल्ली , अगस्त 24 -- केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने सोमवार को युवा पीढ़ी की बात सुनने, उनकी चिंताओं को समझने और एक ऐसा वातावरण बनाने के महत्व पर जोर दिया, जहां वे अपने विचारों और चुनौतियों को साझा करने में सहज महसूस करें।
डॉ कुमार ने यहां डॉ. अम्बेडकर इंटरनेशनल सेंटर (डीएआईसी) में 'द फिफ्थ स्पेस-व्हेयर एजुकेशन मीट्स रिस्पॉन्सिबिलिटी' कार्यक्रम के दौरान स्कूली छात्रों को संबोधित करते हुए जोर देकर कहा कि तेजी से बदलते डिजिटल परिवेश में माता-पिता, शिक्षकों और संस्थानों को युवाओं के साथ प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल की आलोचना करने के बजाय समझ के साथ जुड़ने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम का आयोजन राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने डीएआईसी, यूनेस्को नयी दिल्ली और माउंट आबू पब्लिक स्कूल के सहयोग से किया था।
डॉ. कुमार ने छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के बीच मजबूत भावनात्मक संबंध बनाये रखने के महत्व पर जोर दिया, जिससे युवाओं को कठिनाइयों का सामना करने पर मार्गदर्शन और समर्थन प्राप्त करने में सक्षम बनाया जा सके। उन्होंने प्रत्येक बच्चे की व्यक्तिगत शक्तियों, आकांक्षाओं और जरूरतों को पहचानने के महत्व के बारे में भी बताया। उन्होंने केवल चीजों को देखने से लेकर उन्हें गहराई से और सार्थक रूप से समझने से आगे होकर दृष्टि से अंतर्दृष्टि की ओर बढ़ने की आवश्यकता पर बल दिया।
डॉ. कुमार ने 'फिफ्थ स्पेस' की अवधारणा के बारे में बताया, जो घर, स्कूल, संस्कृति, समाज, नागरिकता, ज्ञान और डिजिटल दुनिया के संयोजन का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने जोर दिया कि विशेष रूप से तेजी से डिजिटल वातावरण में बड़े हो रहे युवाओं के बीच प्रौद्योगिकी के साथ नैतिकता, जिम्मेदारी और ठोस निर्णय होना चाहिए।
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