बेंगलुरु , जनवरी 22 -- राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की एक विशेष अदालत ने कर्नाटक निवासी सैयद एम. इदरीस को मुस्लिम युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और उन्हें लश्कर-ए-तैयबा में भर्ती करने के मामले में दोषी करार देते हुए 10 साल के कठोर कारावास एवं 70,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई हैएनआईए ने अप्रैल 2020 में पश्चिम बंगाल पुलिस से इस मामले की जांच संभाली थी और इदरीस एवं जम्मू कश्मीर निवासी अल्ताफ अहमद राथर को गिरफ्तार किया था। एजेंसी ने अपनी जांच के दौरान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग करके स्थानीय युवाओं को कट्टरपंथी बनाने के प्रयासों का खुलासा किया था।
इदरीस के अलावा, सह-आरोपी तानिया परवीन और पाकिस्तान स्थित दो फरार आरोपियों, आयशा और बिलाल के खिलाफ आरोप पत्र दायर किए गए हैं। इस मामले के संबंध में गिरफ्तार किए गए अन्य संदिग्धों के खिलाफ कार्रवाई जारी है।
जांच से पता चला है कि इदरीस और राथर ने स्थानीय युवाओं की भर्ती करके लश्कर-ए-तैयबा का मॉड्यूल बनाने की साजिश रची थी। तानिया को पहले पश्चिम बंगाल पुलिस की एसटीएफ ने मार्च 2020 में एक विशेष सूचना के आधार पर उत्तर 24 परगना से गिरफ्तार किया था। तलाशी अभियान के दौरान एसटीएफ ने जिहादी किताबें और अन्य आपत्तिजनक सामग्रियां जब्त की थीं।
जांच के दौरान पाया गया कि भारत सरकार के खिलाफ जिहाद छेड़ने के लिए सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं को कट्टरपंथी बनाया जा रहा था।
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