कंपाला , जुलाई 29 -- युगांडा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने सोमवार को वर्ष 2026 में फैले इबोला प्रकोप की आधिकारिक समाप्ति की घोषणा करते हुए कहा कि देश अब इबोला मुक्त हो गया है।
मंत्रालय ने बताया कि अंतिम संक्रमित युगांडाई मरीज को 16 जून 2026 को अस्पताल से छुट्टी दिये जाने के बाद शुरू हुई अनिवार्य 42 दिन की निगरानी अवधि सफलतापूर्वक पूरी हो गयी है। इस दौरान देशभर में गहन निगरानी रखी गयी और इबोला का कोई नया मामला सामने नहीं आया।
मंत्रालय के अनुसार, इस बार का प्रकोप पहले के इबोला प्रकोपों से अलग था, क्योंकि इसकी शुरुआत बाहरी स्रोत से संक्रमण आने की पूरी तरह प्रमाणित घटना से हुई थी। संक्रमण के स्रोत की पहचान कर ली गयी थी, उसके देश में प्रवेश के मार्ग का पता लगा लिया गया था, सभी पुष्ट मामलों के बीच महामारी विज्ञान संबंधी कड़ी स्थापित की गयी थी तथा संक्रमण की पूरी श्रृंखला का पता लगाकर सभी संपर्कों को संस्थागत क्वारंटीन में रखा गया। सभी संपर्कों ने अनिवार्य 21 दिन की निगरानी अवधि बिना किसी नये संक्रमण के पूरी की।
मंत्रालय ने कहा कि वर्तमान अंतरराष्ट्रीय दिशा-निर्देश बनने के बाद प्रकोप की जांच और नियंत्रण की क्षमता में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। अब तीव्र आणविक जांच, संपूर्ण जीनोम अनुक्रमण, डिजिटल निगरानी, वास्तविक समय में संपर्क अनुरेखण और मजबूत आपदा प्रबंधन प्रणाली के कारण संक्रमण की स्थिति का पहले की तुलना में कहीं अधिक सटीक आकलन संभव हो सका है।
जीनोमिक विश्लेषण में यह भी पुष्टि हुई कि इस प्रकोप के दौरान फैलने वाला वायरस बुंडिबुग्यो वायरस का एक अलग स्वरूप था। मंत्रालय ने कहा कि इस संबंध में वैज्ञानिक अध्ययन अभी भी जारी है और इबोला वायरस के बारे में समझ लगातार विकसित हो रही है।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि 42 दिन की निगरानी अवधि का मानदंड अब भी उन परिस्थितियों में महत्वपूर्ण सुरक्षा उपाय है, जहां संक्रमण की शृंखला स्पष्ट नहीं होती। जिन मामलों में हालांकि संक्रमण का स्रोत पूरी तरह स्थापित हो और उसके प्रसार पर पूर्ण नियंत्रण सिद्ध हो चुका हो, वहां केवल निश्चित समय-सीमा ही प्रकोप समाप्त घोषित करने का एकमात्र आधार नहीं हो सकती।
युगांडा ने 15 मई 2026 को कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) से आये संक्रमित मामलों की पुष्टि के बाद इबोला प्रकोप की घोषणा की थी। इस दौरान कुल 20 पुष्ट मामले सामने आये, जिनमें 18 मरीज स्वस्थ हो गये, जबकि दो की मृत्यु हो गयी। इनमें 15 मामले डीआरसी से आये थे, जबकि पांच युगांडाई नागरिक संक्रमित मरीजों की देखभाल के दौरान संक्रमित हुए थे।
सरकार ने कहा कि यह सफलता वर्षों से सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने में किये गये निवेश का परिणाम है। संक्रमितों की शीघ्र पहचान, संपर्कों का पता लगाने, गुणवत्तापूर्ण उपचार, प्रयोगशाला सेवाओं के विस्तार और समुदायों के सहयोग से प्रकोप पर तेजी से नियंत्रण पाया गया।मंत्रालय ने अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कर्मियों, स्थानीय समुदायों, सरकारी एजेंसियों, सुरक्षा बलों और सहयोगी संस्थाओं के योगदान की भी सराहना की।
सरकार ने आगाह किया कि क्षेत्र में इबोला का खतरा अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है, क्योंकि पड़ोसी कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में प्रकोप अभी जारी है। इस कारण युगांडा ने सीमावर्ती क्षेत्रों और समुदायों में निगरानी बढ़ा दी है, त्वरित प्रतिक्रिया दलों को मजबूत किया है और किसी भी संदिग्ध मामले से निपटने की तैयारी बनाये रखी है।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, "यह उपलब्धि हमारे स्वास्थ्य कर्मचारियों की प्रतिबद्धता और पेशेवर रवैये, समुदायों की सतर्कता एवं सरकार, स्थानीय नेताओं, सुरक्षा एजेंसियों व सहयोगियों के बीच करीबी तालमेल को भी दर्शाती है।"बयान में कहा गया, " इस उपलब्धि का जश्न मनाते हुए हमें यह याद रखना चाहिए कि हमारे क्षेत्र में इबोला का खतरा अभी भी बना हुआ है। पड़ोसी देश कांगो में इसका प्रकोप अभी भी फैल रहा है, और युगांडा सीमा पर रहने वाले समुदाय खतरे के सबसे करीब हैं। इसने रैपिड रिस्पॉन्स टीमों को मजबूत किया है और देश भर के जिलों के साथ मिलकर काम करना जारी रखा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि युगांडा किसी भी संदिग्ध मामले पर तुरंत प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार रहे।"क्षेत्रीय सहयोग के तहत युगांडा और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य ने सीमा पार संयुक्त इबोला नियंत्रण अभियान के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किये हैं। इसके तहत युगांडा ने डीआरसी के अरू और कासेनी क्षेत्रों में दो मोबाइल प्रयोगशालाएं तथा 80 बिस्तरों वाला इबोला उपचार केंद्र स्थापित किया है। सरकार ने कहा कि संक्रमण को उसके स्रोत पर ही नियंत्रित करना दोनों देशों और पूरे क्षेत्र की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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