अदन , जनवरी 29 -- यमन सरकार और हाउथी समूह ने पिछले महीने ओमान में संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की मध्यस्थता से हुई बातचीत के दौरान हुए बुधवार को कैदियों के अदला-बदली समझौते को लागू करने में देरी को लेकर एक-दूसरे पर आरोप लगाये ।

यमन के राष्ट्रपति के सलाहकार अब्दुल मलिक मिखलाफी ने सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में हाउथी पर समझौते में बाधा डालने और संयुक्त राष्ट्र संघ की मध्यस्थता वाले समझौतों के तहत किए गए वादों से मुकरने का आरोप लगाया। श्री मिखलाफी ने कहा, "हाउथी मिलिशिया समझौतों को नैतिक या मानवीय दायित्व के रूप में नहीं बल्कि राजनीतिक ब्लैकमेल के साधन के रूप में देखती है।" उन्होंने इसे कैदियों और उनके परिवारों के प्रति बार-बार उल्लंघन और उपेक्षा बताया।

उन्होंने कहा कि मस्कट समझौते को लागू करने में विफलता गंभीरता की कमी और 'अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय विचारों के प्रति तिरस्कार' को दर्शाती है। उन्होंने हालांकि इसके बारे में और जानकारी नहीं दी।

हाउथी ने अपनी तरफ से किभी भी तरह की देरी से इनकार किया है । समूह की कैदी मामलों की समिति के प्रमुख अब्दुल कादर अल-मुरतादा ने कहा कि समूह ने मस्कट वार्ता के पिछले दौर से पहले ही अपनी कैदियों की सूची जमा कर दी थी।

श्री अल-मुरतादा ने इस सप्ताह की शुरुआत में कहा, "सूचियों के आदान-प्रदान में देरी हमारी तरफ से नहीं है।" उन्होंने कहा कि दूसरे पक्ष ने मस्कट समझौते द्वारा तय समय-सीमा के भीतर अपनी सूची जमा नहीं की।

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