अदन , अक्टूबर 18 -- यमन की अधिकारी अफरा अल-जौबा ने यमन संघर्ष में मध्यस्थता करने के ईरान के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान हूती विद्रोहियों को सैन्य, वित्तीय और राजनीतिक समर्थन देकर युद्ध को लंबा खींच रहा है।
श्री अल-जौबा ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक विस्तृत पोस्ट में कहा कि ईरान ऐसे संघर्ष में मध्यस्थ की भूमिका नहीं निभा सकता, जिसमें यमन की सरकार उसे एक पक्ष मानती है। उन्होंने कहा, "जो लोग युद्ध में एक पक्ष को हथियार मुहैया कराते हैं, वे उसी युद्ध में मध्यस्थ नहीं बन सकते।" उन्होंने ईरान पर हूती विद्रोहियों को धन, प्रशिक्षण, हथियार, मिसाइलें और ड्रोन उपलब्ध कराने का आरोप लगाया।
उन्होंने ईरान से यमन में अपना प्रभाव और हथियार वापस लेने, राष्ट्रीय संप्रभुता का सम्मान करने तथा अंतरराष्ट्रीय कानून और अच्छे पड़ोसी संबंधों के सिद्धांतों का पालन करने का आग्रह किया।
श्री अल-जौबा ने कहा कि ईरान ने मध्यस्थता का प्रस्ताव ऐसे समय दिया है, जब संघर्ष तेज हो रहा है। उन्होंने हूती विद्रोहियों पर अंतरिम राजधानी अदन में राष्ट्रपति और सरकारी मुख्यालयों को निशाना बनाने, ताइज़ की घेराबंदी करने, नागरिक ठिकानों पर हमले करने और सऊदी अरब पर हमले शुरू करने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय समुद्री नौवहन को खतरे में डालने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि ईरान का यह प्रस्ताव हूती समूह के उस रुख के विपरीत है, जिसके तहत वह बार-बार राजनीतिक पहलों तथा राजनीतिक प्रक्रिया को फिर से शुरू करने के क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रयासों को खारिज करता रहा है।
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