सना , सितंबर 12 -- यमन के सरकारी बलों ने शनिवार को दक्षिण-पश्चिमी अल-धाले प्रांत में हूती ठिकानों पर "सटीक" ड्रोन हमले किये। देश में वर्षों से चली आ रही अपेक्षाकृत शांति के बाद दोनों पक्षों के बीच लड़ाई तेज हो गयी है।

नेशन्स शील्ड फोर्सेज ने एक बयान में कहा कि उसके ड्रोन ने अल-धाले में हूती ठिकानों को निशाना बनाया, हालांकि ठिकानों की सटीक जगह नहीं बतायी गयी। बलों की ओर से जारी वीडियो में दर्जनों हूती सदस्यों के एक समूह पर हवाई हमला करते हुए दिखाया गया है।

ये हमले जुलाई की शुरुआत से यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार और हूतियों के बीच लड़ाई में तेज वृद्धि के बीच हुए हैं। इस दौरान दोनों पक्षों ने विभिन्न इलाकों में क्षेत्रीय बढ़त हासिल की है।

हूतियों ने पश्चिमी ताइज प्रांत के कुछ हिस्सों पर नियंत्रण कर लिया है, जिसमें तटीय शहर मोखा और उसका लाल सागर बंदरगाह भी शामिल है। उनका दावा है कि उन्होंने पूरे पश्चिमी अल-हुदायदाह प्रांत पर भी नियंत्रण कर लिया है। उनकी बढ़त से वे बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य के और करीब पहुंच गये हैं, जो लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ने वाला अंतरराष्ट्रीय समुद्री परिवहन का प्रमुख मार्ग है।

इस बीच, सरकारी बलों ने सऊदी अरब की सीमा से लगे उत्तरी अल-जौफ प्रांत में बढ़त हासिल की है और प्रांतीय राजधानी अल-हज्म के करीब पहुंच गये हैं। मारिब, अल-बायदा और अल-धाले प्रांतों में भी लड़ाई जारी है।

यमन में संघर्ष 2014 में उस समय तेज हुआ था, जब हूतियों ने राजधानी सना पर कब्जा कर देश के बड़े हिस्से में अपना नियंत्रण बढ़ा लिया था। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के समर्थन में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने मार्च 2015 में हस्तक्षेप किया था।

यमन में संघर्ष के बढ़ने के बीच सऊदी अरब ने रियाद और मदीना क्षेत्रों में अपनी ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन पर हुए ड्रोन हमलों की निंदा की है। सऊदी अरब ने कहा कि ड्रोन इराक से आये थे और इन हमलों में लोग घायल हुए तथा संपत्ति को नुकसान पहुंचा।

सऊदी विदेश मंत्रालय ने कहा कि कई ड्रोन ने रणनीतिक तेल पाइपलाइन को निशाना बनाया और नुकसान का आकलन किया जा रहा है। मंत्रालय ने कहा कि इराक के प्रधानमंत्री अली फालिह अल-जैदी के अनुरोध के बाद रियाद ने तत्काल जवाबी कार्रवाई नहीं करने का फैसला किया है। उन्होंने सऊदी अरब से बगदाद को इराकी क्षेत्र से सऊदी अरब और पड़ोसी देशों के खिलाफ होने वाले हमलों को रोकने के लिए कदम उठाने का अवसर देने का अनुरोध किया था।

मंत्रालय ने कहा, "इराक गणराज्य के प्रधानमंत्री के अनुरोध के आधार पर सऊदी अरब ने इस चरण में जवाब नहीं देने और इसके बजाय इराकी सरकार के प्रयासों का समर्थन करने का फैसला किया है।"उसने कहा कि सऊदी अरब अपनी संप्रभुता, सुरक्षा, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे, नागरिकों और निवासियों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है। सऊदी अधिकारियों ने शुक्रवार को कहा कि रियाद और मदीना क्षेत्रों में कई हमलों के बाद एहतियाती कदम के तौर पर ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन का संचालन अस्थायी रूप से रोक दिया गया है।

सऊदी ऊर्जा मंत्रालय के एक सूत्र ने कहा कि हमले गुरुवार सुबह हुए, जिनमें पाइपलाइन को नुकसान पहुंचा और लोग घायल हुए। सुविधा की सुरक्षा सुनिश्चित करने, नुकसान का आकलन करने और इसकी सुरक्षित स्थिति की जांच के लिए आपातकालीन दल और विशेषज्ञ कर्मचारियों को तैनात किया गया।

सूत्र ने कहा कि निर्धारित आपातकालीन और सुरक्षा प्रक्रियाओं के तहत निरीक्षण और मरम्मत का काम जारी रहने के दौरान पाइपलाइन का संचालन अस्थायी रूप से निलंबित रखा गया है।

इस बीच, यमनी वायुसेना ने मोखा और धुबाब क्षेत्र में हूती ठिकानों पर हवाई हमले किये।यमनी सशस्त्र बलों के आधिकारिक प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल माजिद अब्दुल्ला अल-नुजैली ने शुक्रवार को बताया कि हमलों में मोखा बंदरगाह के पास तथा मोखा शहर के जैद अल-खर्ज मॉल के निकट वाहनों और हथियारों को नष्ट कर दिया गया तथा कईं हूती लड़ाके मारे गये हैं।

उन्होंने कहा कि मोखा में जल परियोजना प्रशासन के पास भी कई लड़ाके मारे गये। इसके अलावा मोखा शहर से 11 किलोमीटर (सात मील) दूर मोखा-धुबाब मार्ग पर स्थित पशु संगरोध केंद्र में वाहनों और लड़ाकों के समूह को निशाना बनाया गया।

श्री अल-नुजैली ने बताया कि मोखा में उत्तरी रिंग रोड पर एक सैन्य कमांडर के पूर्व मुख्यालय में मौजूद हूती लड़ाकों के समूह को भी नष्ट कर दिया गया। इस संबंध में तत्काल कोई अन्य जानकारी उपलब्ध नहीं हो सकी है।

यमन में 2022 से अपेक्षाकृत शांति बनी हुई थी। इससे पहले करीब 12 वर्षों तक सरकार समर्थक बलों और सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन तथा ईरान समर्थित हूतियों के बीच युद्ध चलता रहा था। हूतियों ने 2014 में राजधानी सना और देश के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया था।

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