आइजोल , मई 03 -- म्यांमार के चिन राज्य में ताजा हिंसा के बाद शरणार्थियों का एक समूह मिजोरम पहुंचा है।

सप्ताहांत में म्यांमार सेना के एक हवाई हमले में सात नागरिकों की मौत के बाद 150 से अधिक लोग भारत में शरण लेने के लिए सीमा पार कर मिजोरम में दाखिल हुए। मृतकों में ज्यादातर बच्चे थे।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार ये शरणार्थी चंफाई जिले के जोखावथार गांव के रास्ते भारत पहुंचे, जो भारत-म्यांमार सीमा के प्रमुख प्रवेश बिंदुओं में से एक है।

यह पलायन शुक्रवार दोपहर म्यांमार सेना द्वारा फलाम टाउनशिप के खावपुइछिप गांव पर किए गए हवाई हमले के बाद हुआ। सीमा पार से मिली जानकारी के अनुसार म्यांमार समयानुसार दोपहर लगभग 3:20 बजे गांव पर दो बम गिराए गए। यह गांव तियाउ नदी के निकट स्थित है, जो भारत और म्यांमार के बीच प्राकृतिक सीमा का काम करती है।

हमले में मिजो समुदाय के सात लोगों की मौत हो गई, जिनमें छह बच्चे शामिल थे। मृतकों की पहचान लालनुनफेला (29), उनके पांच माह के शिशु पुत्र लालरिनजुआला, अन्य दो पुत्र लालहुआपजाउवा (4) और मालसावमाविया (5), तथा लालरिन्नुंगा (10), लालह्रिआटकिमा (5) और जेडिडिया लालदुहसाका (3) के रूप में हुई है।

हमले में कई अन्य लोग घायल भी हुए हैं। चिन राज्य के स्थानीय नागरिक संगठनों और प्रतिरोध समूहों ने इस बमबारी की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि गांव में कोई सशस्त्र समूह या सैन्य प्रतिष्ठान मौजूद नहीं था।

भारतीय सीमा की ओर, मिजोरम पर मानवीय दबाव और बढ़ गया है। राज्य 2021 में म्यांमार में सैन्य तख्तापलट के बाद से हजारों शरणार्थियों को आश्रय देता आ रहा है।

जोखावथार में अधिकांश नए शरणार्थियों को उनके रिश्तेदारों ने अपने यहां ठहराया है, जबकि अन्य लोगों को सामुदायिक भवनों और सार्वजनिक स्थलों में रखा गया है।हुआलंगोराम पीपुल्स ऑर्गेनाइजेशन और चिनलैंड डिफेंस फोर्स-हुआलंगोराम के प्रतिनिधियों ने इसे नागरिकों पर बिना उकसावे का हमला बताया।

एक प्रतिनिधि ने कहा, "इस क्षेत्र में किसी भी सशस्त्र समूह की मौजूदगी नहीं थी। इस हमले को किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता।"चंफाई जिले के ही वाफाई गांव में भी कम से कम 20 विस्थापित पहुंचे हैं। स्थानीय प्रशासन के अनुसार यह गांव पहले से 900 से अधिक शरणार्थियों को आश्रय दे रहा है। अतिरिक्त समूह सैखुम्फाई की ओर भी बढ़े हैं, जो सीमा के निकट एक छोटा बस्ती क्षेत्र है।

इस बीच सीमा पार आवाजाही पर सख्ती बढ़ने के संकेत भी मिले हैं। स्थानीय स्वयंसेवकों के अनुसार सैखुम्फाई क्षेत्र में हिंसा से भाग रहे कई लोग तियाउ नदी के म्यांमार वाले हिस्से में फंसे हुए हैं, क्योंकि असम राइफल्स के जवानों ने उन्हें भारतीय क्षेत्र में प्रवेश से रोक दिया।

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