कपूरथला , अप्रैल 07 -- पंजाब में कपूरथला बागवानी विभाग के उपनिदेशक डॉ दलजीत सिंह गिल ने जिले के फल उत्पादक किसानों को सलाह दी है कि इस वर्ष मौसम के अप्रत्याशित बदलावों के कारण खरबूजे और तरबूज की फसल का विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है।
उन्होंने मंगलवार को कहा कि खरबूजे और तरबूज की पैदावार के मामले में रूपेवाल की मंडी पूरे एशिया में प्रसिद्ध है। इस क्षेत्र के किसानों ने अपनी कड़ी मेहनत से इस फसल के जरिए कपूरथला जिले का नाम रोशन किया है लेकिन इस वर्ष मौसम के अप्रत्याशित बदलावों के कारण इस फसल का विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है।
कपूरथला जिले में रेतीली दोमट मिट्टी होने के कारण किसान काफी बड़े रकबे में बेल वाली सब्जियां उगाते हैं। इस जिले के किसान लंबे समय से खरबूजे और तरबूज (हदवाणे) की खेती कर रहे हैं। आलू की फसल के बाद का फसल चक्र कद्दू वर्गीय फसलों के लिए बहुत उत्तम माना जाता है।
उन्होंने फसल की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए कहा कि वर्तमान मौसम को देखते हुए खरबूजे/तरबूज की फसल अभी अच्छी स्थिति में है, लेकिन इसे पीले धब्बों के रोग (डाउन मिल्ड्यू) और झुलसा रोग (ब्लाइट) आदि से बचाने के लिए फफूंदनाशक स्प्रे करने की जरूरत है। किसान 300-600 ग्राम इंडोफिल एम-45 या कवच को 200 लीटर पानी में घोलकर एक सप्ताह के अंतराल पर छिड़काव करें। पहला छिड़काव बीमारी शुरू होने से पहले ही कर देना चाहिए। यदि बारिश हो जाए, तो उसके बाद दोबारा छिड़काव करना आवश्यक है। उन्होने कहा कि यदि बीमारी का प्रकोप अधिक हो, तो 500 ग्राम रिडोमिल एम-जेड या 600 ग्राम एलियट प्रति एकड़ के हिसाब से 10 दिन के अंतराल पर दो छिड़काव करें।
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