संयुक्त राष्ट्र , सितंबर 15 -- गाजा में तबाही के मलबे से मानव अवशेषों की निकासी के बीच संयुक्त राष्ट्र ने इजरायल से अंतरराष्ट्रीय जांचकर्ताओं को गाजा के सभी हिस्सों में जाने देने की अनुमति देने का आह्वान किया है।

युद्ध शुरू होने के लगभग तीन वर्ष बाद भी मलबे में दबे शवों को निकालने का काम जारी है।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने नष्ट हुए स्थलों से साक्ष्य एकत्र करने को आवश्यक बताते हुए आग्रह किया, ''साक्ष्य जुटाने में सहायता के लिए अंतरराष्ट्रीय जांचकर्ताओं को गाजा के सभी हिस्सों में प्रवेश की अनुमति दी जाए।"मलबे से निकाले जा रहे अधिकतर शव महिलाओं और बच्चों के बताये जा रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि यह विवरण इस संभावना की ओर इशारा करता है कि युद्ध अभियान के दौरान युद्ध अपराध किये गये थे।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने एक बयान में कहा, "इजरायली हमलों में पूरी तरह तबाह हो चुके स्थानों से अब पूरे-पूरे परिवारों के अवशेष निकाले जा रहे हैं।"उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा, "मुझे इस बात का डर है कि अब तक बरामद अवशेष असली तबाही का एक बहुत छोटा हिस्सा हो सकते हैं।" उन्होंने बताया कि इजरायली बमबारी, बुलडोजर और विस्फोटकों के इस्तेमाल से गाजा का बड़ा हिस्सा पूरी तरह समतल कर दिया गया है।

उन्होंने कहा, "आज भी गाजा के कई इलाकों में जहां इज़राइली सेना तैनात है, मलबे के नीचे दबे शवों का सम्मान किये बिना बुलडोजरों से इमारतों को ढहाया जा रहा है।"फ़िलिस्तीनी नागरिक सुरक्षा के अनुसार, बीते वर्ष नवंबर से अब तक पूरे गाजा में ढही हुई इमारतों के नीचे से 630 से अधिक शव और मानव अवशेष निकाले जा चुके हैं।

वहीं संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने एक अनुमान का हवाला देते हुए बताया कि मलबे के नीचे अब भी 8,000 से अधिक लोग लापता हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि इस क्षेत्र में हुई तबाही का एक बड़ा हिस्सा अब भी सामने आना बाकी है।

श्री तुर्क ने जोर देकर कहा, "पीड़ितों के दस्तावेजीकरण, उनकी पहचान, फोरेंसिक जानकारी और जैविक नमूनों को संरक्षित करने, उनके दफ़न स्थलों को रिकॉर्ड करने और उनके परिवारों को सूचित करने के लिए हर संभव प्रयास किये जाने चाहिए।"उन्होंने चेतावनी दी कि गाजा शहर में मलबे के नीचे भारी मात्रा में अवशेषों का मिलना युद्ध अपराधों और अन्य भीषण अपराधों की चिंताओं को फिर से सतह पर ले आया है।

उल्लेखनीय है कि यह युद्ध सात अक्टूबर 2023 को इजरायल पर हमास के हमले के बाद शुरू हुआ था, जिसमें आधिकारिक इजरायली आंकड़ों के अनुसार कम से कम 1,195 लोग मारे गए थे। इसके जवाब में इजरायल के बमबारी अभियान और सैन्य कार्रवाई ने गाजा के बड़े हिस्से को मलबे में तब्दील कर दिया था।

हमास प्रशासन के तहत काम करने वाले गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इजरायली सैन्य कार्रवाई में कुल मिलाकर 73,000 से अधिक फ़िलिस्तीनी मारे जा चुके हैं, जिनमें बीते अक्टूबर में हुए संघर्षविराम के बाद से मारे गये 1,350 से अधिक लोग भी शामिल हैं।

इस संघर्ष के कूटनीतिक प्रभावों से निपट रही यूरोपीय सरकारों के लिए संयुक्त राष्ट्र का यह आह्वान इजरायल पर गाजा को स्वतंत्र जांच के लिए खोलने का दबाव बढ़ा रहा है, ऐसे समय में जब नागरिकों के नुकसान का पूरा दायरा अब भी खुलकर सामने आ रहा है।

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