इटावा , जनवरी 29 -- उत्तर प्रदेश के इटावा में फिशर वन क्षेत्र में स्थित मुस्लिम आक्रांता मोहम्मद गौरी के सेनापति शमसुद्दीन की मजार को लेकर वन विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। विभाग का कहना है कि संरक्षित वन क्षेत्र में यह निर्माण अवैध रूप से किया गया है। मामले के सामने आने के बाद मजार तक जाने वाले रास्ते को पांच स्थानों पर कट लगाकर बंद कर दिया गया है तथा मौके पर वन कर्मियों की तैनाती कर दी गई है, ताकि कोई भी व्यक्ति वहां तक न पहुंच सके।
वन विभाग के अनुसार गुरुवार को बड़ी संख्या में लोग मजार पर जाने का प्रयास करते हैं, इसी को देखते हुए एहतियातन रास्ता पूरी तरह बंद किया गया। इसके बावजूद कुछ लोग मौके पर पहुंचे, जिन्हें वापस लौटा दिया गया। ड्यूटी पर तैनात वनकर्मी हाकिम सिंह ने बताया कि चार वनकर्मियों की तैनाती की गई है और लगातार निगरानी रखी जा रही है।
जिला वन अधिकारी विकास नायक ने बताया कि तीन जनवरी को मुख्यमंत्री कार्यालय से इस मजार को लेकर जानकारी मिलने के बाद जांच शुरू की गई थी। इसके तहत बढ़पुरा रेंज के वन अधिकारी अशोक कुमार शर्मा ने मजार की देखरेख करने वाले फतेह इलाही को नोटिस जारी कर 22 जनवरी तक भूमि से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे, लेकिन तय समय सीमा तक कोई अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए गए। इसके बाद विभाग ने वैधानिक प्रक्रिया के तहत कार्रवाई तेज कर दी है।
वन विभाग का कहना है कि फिशर वन एक संरक्षित क्षेत्र है, जहां किसी भी प्रकार का निर्माण नियमों के खिलाफ है। मजार के आसपास समय के साथ किए गए अन्य निर्माणों को लेकर भी जांच की जा रही है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार विधिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी, ताकि संरक्षित वन क्षेत्र की स्थिति को यथावत रखा जा सके।
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