नैनीताल , मार्च 20 -- हाल ही में सोशल मीडिया पर सुर्खियों में आये कोटद्वार के मोहम्मद दीपक को शुक्रवार को उच्च न्यायालय से कोई राहत नहीं मिली है। उल्टा अदालत ने उसे पुलिस जांच में सहयोग करने और सोशल मीडिया पर जांच पर प्रभाव पड़ने वाली ऐसी कोई पोस्ट न डालने की हिदायत भी दी है।
मोहम्मद दीपक उर्फ दीपक कुमार उर्फ अक्की और अन्य की दायर याचिका पर न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की पीठ में सुनवाई हुई।
याचिकाकर्ताओं की ओर से उनके खिलाफ दायर याचिका को निरस्त करने, 31 जनवरी की घटना को लेकर आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने, याचिकाकर्ता को पुलिस सुरक्षा मुहैया कराने और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई न करने वाले दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ जांच की मांग की गयी थी।
याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी कहा गया कि उसके खिलाफ जो एफआईआर दर्ज की गई है वह गलत है। पुलिस आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रही है और न ही उसकी शिकायत पर आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
अदालत ने याचिका को पूरी तरह से निस्तारित करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता स्वयं जांच के दायरे में हैं और ऐसे में पुलिस सुरक्षा की मांग उचित नहीं है।
हालांकि सरकार की ओर से कहा गया कि याचिकाकर्ता को पुलिस की ओर से सुरक्षा मुहैया करायी गई थी और उसके जिम के बाहर भी पुलिस टीम तैनात की गई थी। सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि याचिकाकर्ता सोशल मीडिया पर सक्रिय रहा है और इस पूरे मामले में पुलिस की ओर से दो मामले दर्ज किए गए हैं। जांच जारी है और कुछ लोगों को चिन्हित किया गया है।
अदालत ने सुरक्षा की मांग को भी गंभीरता से लेते हुए हैरानी जताई कि याचिकाकर्ता की ओर से पुलिस की ओर से मुहैया कराई गई सुरक्षा का उल्लेख याचिका में नहीं किया गया है।
अदालत ने याचिकाकर्ताओं की सभी तीन मांगों को खारिज करते हुए साफ साफ निर्देश दिए कि वह निष्पक्ष जांच में पुलिस का सहयोग करें और सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर कोई ऐसी कोई पोस्ट न डालें जिससे जांच पर प्रभाव पड़े।
अदालत ने पुलिस को भी अरनेश कुमार मामले के परिपेक्ष्य में जांच पूरी करने के निर्देश दिए हैं।
यहां बता दें कि पौड़ी गढ़वाल के कोटद्वार में विगत 26 जनवरी को एक दुकान के नाम को लेकर विवाद के बाद तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। आरोप है कि कुछ लोगों ने समुदाय विशेष के बुजुर्ग दुकानदार पर दुकान का नाम बदलने का दबाव बनाया था। इसी दौरान जिम संचालक दीपक कुमार ने हस्तक्षेप करते हुए खुद को "मोहम्मद दीपक" बताया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
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