भोपाल , फरवरी 18 -- मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मध्यप्रदेश की मोहन सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट को प्रदेश की जनता के साथ विश्वासघात करार देते हुए इसे "ठग बजट" बताया है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि 4.38 लाख करोड़ रुपये के बजट के पीछे 78 हजार करोड़ रुपये का राजकोषीय घाटा छिपा हुआ है, जिसकी स्पष्ट व्याख्या सरकार नहीं कर पा रही है कि भविष्य में इसकी पूर्ति किस प्रकार की जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि बजट का आकार जानबूझकर बढ़ाया गया है ताकि अधिक कर्ज लेने का रास्ता बनाया जा सके।

उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष 4.21 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया गया था, लेकिन उसका लगभग 50 प्रतिशत तक उपयोग नहीं हो पाया। इसके बावजूद सरकार प्रतिदिन औसतन 213 करोड़ रुपये का कर्ज लेती रही, जो वित्तीय कुप्रबंधन का प्रमाण है और प्रदेश को कर्ज के दलदल में धकेल रहा है।

श्री पटवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव को अन्य मुद्दों के बजाय अपनी सरकार में व्याप्त भ्रष्टाचार पर ध्यान देना चाहिए, तभी प्रदेश आर्थिक संकट से बाहर निकल सकेगा। उन्होंने बजट को जनता पर बोझ बढ़ाने वाला बताया।

उन्होंने मुख्यमंत्री के इस कथन पर भी सवाल उठाए कि सरकार ने कोई नया कर नहीं बढ़ाया है। पटवारी ने कहा कि पेट्रोल, डीज़ल और एलपीजी पर वैट की दरों के कारण मध्यप्रदेश पहले से ही महंगे राज्यों में शामिल है और जनता पर अप्रत्यक्ष रूप से बोझ डाला जा रहा है।

किसानों के संदर्भ में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी के तहत सोयाबीन 6000 रुपये, धान 3100 रुपये और गेहूं 2700 रुपये प्रति क्विंटल खरीदने के वादे किए गए थे, लेकिन बजट में इसके लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं दिखता। लाड़ली बहनों को 3000 रुपये प्रतिमाह देने की घोषणा के संबंध में भी स्पष्ट और पर्याप्त प्रावधान नहीं है।

उन्होंने आरोप लगाया कि 78 हजार करोड़ रुपये के घाटे वाले इस बजट में पूर्व में लिए गए 70 हजार करोड़ रुपये के कर्ज का समुचित लेखा-जोखा स्पष्ट नहीं है। प्रधानमंत्री आवास, मनरेगा और अन्य केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लिए राज्य बजट से प्रावधान किए जाने पर उन्होंने कहा कि यह राज्य के बजट की स्वायत्तता पर प्रश्न खड़ा करता है।

पटवारी ने कहा कि सरकार एक ओर कृषि वर्ष मनाने की घोषणा करती है और 1000 करोड़ रुपये के प्रावधान की बात करती है, लेकिन धान, सोयाबीन और गेहूं जैसे प्रमुख कृषि उत्पादों के समर्थन मूल्य पर कोई स्पष्ट निर्णय बजट में परिलक्षित नहीं होता।

अंत में उन्होंने कहा कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति चरमरा चुकी है और मुख्यमंत्री मोहन यादव प्रदेश की अर्थव्यवस्था को संभालने में असफल रहे हैं। कांग्रेस पार्टी इस जनविरोधी और छलपूर्ण बजट का विरोध करती है।

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