चंडीगढ़ , सितंबर 12 -- पंजाब पुलिस ने केंद्रीय एजेंसियों के समन्वय से कुख्यात गैंगस्टर जग्गू भगवानपुरिया गिरोह के प्रमुख सदस्य अमृतपाल सिंह उर्फ अमृत दळम को मोल्दोवा से भारत प्रत्यर्पित कराया है।

पुलिस महानिदेशक गौरव यादव ने शनिवार को इसे अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध के खिलाफ बड़ी सफलता बताते हुए कहा कि यह पंजाब पुलिस का किसी यूरोपीय देश से पहला प्रत्यर्पण है। उन्होंने कहा कि अमृत दळम हत्या, हत्या के प्रयास, गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए), शस्त्र अधिनियम और मादक पदार्थों से जुड़े कई मामलों में वांछित था। उसे 24 फरवरी 2026 को यूक्रेन जाने के लिए ओटाची सीमा पार करने का प्रयास करते समय मोल्दोवा के अधिकारियों ने हिरासत में लिया था। चिसिनाउ की अदालत ने 26 मई को उसके प्रत्यर्पण की अनुमति दी, जबकि अपील अदालत ने 16 जुलाई को उसकी अपील खारिज कर दी, जिसके बाद प्रत्यर्पण आदेश अंतिम हो गया।

डीजीपी यादव ने कहा कि पंजाब पुलिस की चार सदस्यीय टीम ने शुक्रवार को चिसिनाउ हवाई अड्डे से अमृत दळम को हिरासत में लिया और शनिवार सुबह उसे नयी दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर लेकर पहुंची। टीम का नेतृत्व एजीटीएफ के एसपी बिक्रमजीत सिंह बराड़ ने किया। उनके साथ इंस्पेक्टर पुषविंदर सिंह, उपनिरीक्षक जसप्रीत सिंह और सहायक उपनिरीक्षक वरिंदर कुमार थे।

एडीजीपी एजीटीएफ प्रमोद बान के अनुसार अमृत दळम कम से कम सात हत्या के मामलों में वांछित है। इनमें 2019 में बटाला के दलजीर सिंह की हत्या, 2024 में होशियारपुर के अमरजीत लाल और कश्मीरी लाल की दोहरी हत्या तथा 2025 में धर्मजीत सिंह उर्फ धर्मा, कनव महाजन और सरबजीत सिंह उर्फ काका की दोहरी हत्या और जसदीप सिंह उर्फ दीप चीमा की हत्या के मामले शामिल हैं।

पुलिस के मुताबिक अमृत दळम अक्टूबर 2024 में हरियाणा के कुरुक्षेत्र निवासी गुरपाल पुत्र हीरा सिंह के नाम-पते पर तैयार फर्जी पासपोर्ट के जरिए विदेश फरार हुआ था। पंजाब पुलिस ने उसके खिलाफ रेड नोटिस जारी कराया और केंद्रीय एजेंसियों के साथ उसके फर्जी पासपोर्ट तथा ठिकानों से संबंधित जानकारी साझा की।

डीजीपी ने इस अभियान में मोल्दोवा और अजरबैजान के अधिकारियों, सीबीआई की अंतरराष्ट्रीय पुलिस सहयोग इकाई, गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय तथा अन्य केंद्रीय एजेंसियों के सहयोग के लिए आभार जताया। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई छह महीने तक चले 'ऑपरेशन ईस्टर्न रीच' के तहत खुफिया जानकारी और अंतरराष्ट्रीय समन्वय का परिणाम है।

आईजीपी काउंटर इंटेलिजेंस आशीष चौधरी ने बताया कि ओएफटीईसी की स्थापना के बाद अब तक अलग-अलग देशों से नौ हाई-प्रायोरिटी भगोड़ों को भारत वापस लाया जा चुका है। अमृत दळम के प्रत्यर्पण सहित इस वर्ष दो प्रत्यर्पण अनुरोध सफल हुए हैं। उन्होंने बताया कि विदेशों में मौजूद 11 अन्य भगोड़ों के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया भी जारी है।

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