जयपुर , जुलाई 21 -- राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने कहा है किकेन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर मोदी सरकार की चुप्पी ने ऐसे हालात पैदा कर दिए कि लोकसभा और राज्यसभा के नेता प्रतिपक्ष को प्रधानमंत्री आवास के सामने धरना देने को मजबूर होना पड़ा है।
श्री गहलोत ने मंगलवार को यहां मीडिया से बातचीत में यह बात कही। उन्होंने कहा कि वह बहुत लंबे अरसे से कह रहा है कि यह देश किस दिशा में जा रहा है, कोई नहीं जानता किस दिशा में जाएगा, किसी को नहीं मालूम। यह जो एक महीने के तमाशे हैं, सरकार ने इस समस्या को जिस रूप में लेना चाहिए था, उस रुप में इसे नहीं लिया और लाखों बच्चों के भविष्य का सवाल है। नीट पेपर आउट हो गया। इसके बाद सरकार को जो कदम उठाये जाने चाहिए उसमें वह पूरी तरह विफल रही है जिससे आंदोलन शुरू हो गए और लोग भूख हड़ताल पर बैठ गए।
उन्होंने कहा कि सरकार का कोई नुमाइंदा जाकर प्रदर्शकारियों से मिले ही नहीं, बात भी नहीं करे कि आप चाहते क्या हो। श्री गहलोत ने कहा कि श्री राहुल गांधी लगातार जब से घटना हुई, तब से श्री प्रधान का इस्तीफा मांग रहे हैं। कोई जवाब नहीं, सरकार का एक्शन भी नहीं तो यह जो हालात बने हैं आज, वह बहुत दुखद है और बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि नेता प्रतिपक्ष को चाहे वह लोकसभा के हैं, चाहे राज्यसभा के हैं श्री राहुल एवं श्री खड़गे तथा अनेक सांसदों को प्रधानमंत्री आवास के सामने धरने पर बैठना पड़े।
उन्होंने कहा कि आप सोच सकते हैं कि देश-दुनिया में क्या मैसेज जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी क्लेम करते हैं कि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक मुल्क हमारा है। क्या-क्या क्लेम नहीं करते हैं! सब जो दावे करते हैं जाके विदेशों में घूम-घूम के,उन सब की पोल खुल चुकी है इस देश के अंदर, जिस प्रकार का व्यवहार सरकार कर रही है और हालात बहुत गंभीर हैं।
उन्होंने कहा कि जो आक्रोश फूट पड़ा है जनता के अंदर,नौजवानों के अंदर, छात्रों के अंदर, वह सरकार जो सोच रही है और असेसमेंट कर रही है, उससे कई गुना अधिक है। इसको समझना पड़ेगा सरकार को। अगर सरकार का कोई लोकतंत्र में विश्वास बचा है थोड़ा बहुत भी, तो समझना पड़ेगा कि आक्रोश बहुत भयंकर है।
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