रांची, मार्च 17 -- झारखण्ड के रांची में आज भाकपा माले महासचिव कॉमरेड दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि बंगाल में जो एस आई आर में 60 लाख लोगों के वोट देने के अधिकार को अधर में लटका दिया गया है और एसी स्थिति में चुनाव होना लोकतंत्र का मजाक है।

श्री भट्टाचार्य ने आज यह संवाददाता सम्मेलन में कहा कि एसआईआर के जरिए भाजपा चुनाव आयोग का इस्तेमाल करते हुए पश्चिम बंगाल में भारी संख्या में महिलाओं और अल्पसंख्यको को मताधिकार से वंचित कर रही है। मतदाता सूची अभी तक तैयार नहीं है। चुनाव आयोग की स्थिति आपत्तिजनक है। बंगाल के गवर्नर को बदल दिया गया है। तमिलनाडु के विवादास्पद गवर्नर को मोदी सरकार ने नियुक्त किया है जिसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने भी आलोचना की है।

श्री भट्टाचार्य ने कहा कि बंगाल के मुख्य सचिव, मुख्य गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक को बदल कर मोदी पुलिस-प्रशासन को पहले ही पूरी तरह से अपने प्रभाव में ले लिया है। चुनाव को अपने पक्ष में करने के लिए भाजपा साम दाम दंड भेद की नीति अपना रही हैं। बंगाल चुनाव में भाकपा माले वाम फ्रंट के साथ मिलकर 10 सीट पर चुनाव लड़ेगी और मजबूत वाम पक्ष तैयार करेगी।

श्री भट्टाचार्य ने कहा कि असम के वृहतर गठबंधन में भाकपा माले शामिल है और कुछ सीटों पर उम्मीद्वार खड़ी करेगी। तमिलनाडु में भाकपा माले 15 सीट पर चुनाव लड़ेगी और शेष सीटों पर डीएमके गठबंधन के साथ मिलकर काम करेगी। केरल में कन्नूर, त्रिवनपुरम , त्रिशूल जिलों में 3 सीट पर लड़ेंगे।

श्री भट्टाचार्य ने कहा कि रमजान के महीने में ईरान पर अमेरिका और इजराइल द्वारा अचानक किए गए हमले में भारत का रूख शर्मनाक है। युद्ध के मामले में भारत को चुप्पी तोड़नी चाहिए। कम से कम भारत के एक करोड़ मजदूर युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में फंसे हुए हैं। अमेरिका-इजरायल की पक्षधरता न के भारत की संप्रभुता बल्कि इसके आर्थिक हितों पर भी चोट कर रही है। भारत तेल और एलपीजी का संकट इसकी अभिव्यक्ति है।

श्री भट्टाचार्य ने कहा कि ईरान के सर्वोच्च नेता के मारे जाने के बावजूद भारत के प्रधानमंत्री का कोई प्रतिक्रिया नहीं देना और 5 हफ्ते बाद विदेश सचिव को भेजना कूटनीतिक विफलता का नतीजा है। यह ईरान के साथ भारत के पारंपरिक संबंधों के विपरीत है। भारत का रूख युद्ध के खिलाफ रहा है।

श्री भट्टाचार्य ने कहा कि मोदी सरकार की कूटनीतिक विफलता ने भारत के अंतर्राष्ट्रीय सम्मान को क्षतिग्रस्त किया है। 19 तारीख को सुप्रीम कोर्ट में यूजीसी रेगुलेशन को लेकर फैसला आने वाला है। हम यूजीसी लागू किए जाने के पक्ष में आवाज बुलंद कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त 18 मार्च को रांची में नरेगा को लेकर, रसोई गैस को लेकर, राजभवन के समक्ष जनसुनवाई है। हम मनरेगा को पुनः वापस लाने की अपील करते हैं।

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