नयी दिल्ली , फरवरी 22 -- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ''मन की बात कार्यक्रम'' में ''आजादी के अमृत महोत्सव'' में लिए गए ''पंच प्राण'' के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि देश अब गुलामी की मानसिकता से मुक्ति की दिशा में ठोस कदम बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत अब औपनिवेशिक प्रतीकों को पीछे छोड़कर अपनी संस्कृति और विरासत से जुड़ी महान विभूतियों को उचित सम्मान दे रहा है।
श्री मोदी ने कहा कि 23 फरवरी को राष्ट्रपति भवन में ''राजाजी उत्सव'' का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर राष्ट्रपति भवन के केन्द्रीय प्रांगण में देश के पहले भारतीय गर्वनर जनरल सी. राजगोपालाचारी की प्रतिमा का अनावरण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि श्री राजगोपालाचारी ने सार्वजनिक जीवन में सादगी, आत्मसंयम तथा सेवा भाव का उदाहरण प्रस्तुत किया।
उन्होंने कहा कि राजाजी उन नेताओं में थे जिन्होंने सत्ता को पद नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम माना। उनका स्वतंत्र चिंतन और नैतिक आचरण आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति भवन में पूर्व में ब्रिटिश वास्तुकार एडविन लुटियंस की प्रतिमा स्थापित थी, जिसे हटाकर अब राजाजी की प्रतिमा स्थापित की जा रही है। उन्होंने इसे औपनिवेशिक प्रतीकों से आगे बढ़कर भारतीय अस्मिता को सम्मान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
श्री मोदी ने कहा कि श्री राजगोपालाचारी के जीवन और योगदान पर आधारित एक प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी जो 24 फरवरी से एक मार्च तक चलेगी। उन्होंने देशवासियों से अपील की कि वे समय निकालकर इस प्रदर्शनी को अवश्य देखें और महान राष्ट्रनिर्माताओं से प्रेरणा लें।
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