नयी दिल्ली , मई 17 -- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नीदरलैंड के प्रधानमंत्री महामहिम रॉब जेटेन के साथ नीदरलैंड के प्रतिष्ठित अफस्लुइटडिज्क बांध का रविवार को भ्रमण किया जो जल प्रबंधन क्षेत्र में दुनिया की एक प्रसिद्ध अवसंरचाना है।
श्री मोदी का इस परियोजना को देखने जाना नवोन्मेषी जल प्रबंधन समाधान, जलवायु सहनशीलता तथा सतत अवसंरचना के प्रति दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। विशाल 32 किलोमीटर लंबा अफस्लुइटडिज्क बांध और उससे बना पुल बाढ़ नियंत्रण और भूमि सुधार के क्षेत्र में एक उदाहरण है। यह बांध नीदरलैंड के समुद्र तल से नीचे के एक बड़े हिस्से को उत्तरी सागर से बचाता है और साथ ही यह मीठे पानी के भंडारण की सुविधा भी प्रदान करता है।
इस बांध के भ्रमण से अफस्लुइटडिज्क और गुजरात राज्य में महत्वाकांक्षी कल्पसर परियोजना के बीच समानताओं की ओर ध्यान गया है। कल्पसर परियोजना का उद्देश्य खंभात की खाड़ी में एक मीठे पानी का जलाशय बनाना है, जो ज्वारीय बिजली उत्पादन, सिंचाई और परिवहन क्षेत्र से जुड़े बुनियादी ढांचों के बीच समन्वय करने वाली परियोजना है।
दोनों पक्षों ने कल्पसर परियोजना पर तकनीकी सहयोग के लिए भारत के जल शक्ति मंत्रालय और नीदरलैंड के बुनियादी ढांचा और जल प्रबंधन मंत्रालय के बीच आशय पत्र पर हस्ताक्षर करने का स्वागत किया है।
दोनों प्रधानमंत्री इस बात पर सहमत थे कि जल अभियांत्रिकी में नीदरलैंड की विशेषज्ञता और भारत की व्यापक कार्यान्वयन क्षमता दोनों देशों के लिए परस्पर लाभकारी साझेदारियों का महत्वपूर्ण अवसर प्रस्तुत करते हैं। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि मोदी की नीदरलैंड के बांध क्षेत्र की यह यात्रा जल क्षेत्र में भारत-नीदरलैंड सामरिक साझेदारी की पुनर्पुष्टि करती है तथा नवाचार और सतत विकास के प्रति दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।
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