नयी दिल्ली , जुलाई 16 -- भारतीय रेलवे हाइड्रोजन क्रांति का आगाज करने जा रहा है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शुक्रवार को हरियाणा के जींद में देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे।

करीब 110 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम गति के साथ तैयार की गयी यह ट्रेन जींद-सोनीपत खंड के 89 किमी मार्ग पर 75 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी। इस ट्रेन के शुरू होने के साथ ही भारत का नाम दुनिया की सबसे बड़ी हाइड्रोजन ट्रेन को संचालित करने वाले देश के तौर पर इतिहास के पन्नों में अंकित हो जायेगा।

रेलने के अनुसार मौजूदा समय में विश्व स्तर पर चलने वाली अधिकतर हाइड्रोजन यात्री ट्रेनों में केवल दो या तीन कोच होते हैं और ये मुख्य रूप से छोटे क्षेत्रीय मार्गों पर ही संचालित होती हैं। वहीं, भारतीय रेलवे की यह ट्रेन 10 कोच वाली है और इसमें लगभग 2,600 यात्री सफर कर सकेंगे।

हाइड्रोजन ट्रेन पारंपरिक ईंधन जैसे डीजल और बिजली से चलने वाली ट्रेनों से काफी अलग होगी। इस ट्रेन ऊर्जा हासिल करने का तरीका एकदम भिन्न है। हाइड्रोजन ट्रेन अपने साथ एक छोटा ऊर्जा संयंत्र लेकर चलती है, जो प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन (पीईएम) ईंधन प्रकोष्ठ के रूप में होता है। ट्रेन के सिलेंडरों में संग्रहित हाइड्रोजन ईंधन प्रकोष्ठ के भीतर आसपास की हवा से ऑक्सीजन से विद्युत उत्पन्न करती है, जिससे कर्षण मोटरें चलती हैं और पहिए घूमते हैं। इस विद्युत रासायनिक अभिक्रिया के प्रत्यक्ष उप-उत्पाद केवल जल वाष्प और ऊष्मा हैं। इसमें कोई दहन, धुआं या टेलपाइप से कार्बन उत्सर्जन नहीं होता है। साधारण शब्दों में कहें, तो यह प्रक्रिया किसी जादू जैसी लग सकती है, जिसमें हाइड्रोजन को सीधे ट्रेन के भीतर बिजली में परिवर्तित किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में केवल जलवाष्प ही प्रत्यक्ष उप-उत्पाद के रूप में निकलती है।

यह तकनीक भारतीय रेलवे को अधिक पर्यावरण-अनुकूल और हरित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। रेलवे के अुसार इस ट्रेन में दो हाइड्रोजन ड्राइविंग पावर कार (डीपीसी) और आठ ट्रेलर कोच (टीसी) शामिल हैं। प्रत्येक ड्राइविंग पावर कार में ईंधन सेल, लिथियम आयरन फॉस्फेट (एलएफपी) बैटरी और हाइड्रोजन भंडारण सिलेंडर लगे होते हैं जो विभिन्न परिचालन स्थितियों में विश्वसनीय संचालन सुनिश्चित करते हुए कर्षण शक्ति प्रदान करने के लिए एक साथ काम करते हैं।

रेलवे ने बताया है कि इस ट्रेन के दोनों सिरों पर स्थित दो पावर कार हैं। प्रत्येक ड्राइविंग पावर कार 1,200 किलोवाट (1600 एचपी) बिजली उत्पन्न करती हैं, जो पूरी ट्रेन को 110 किमी/घंटा की गति तक पहुंचाने के लिए पर्याप्त है। हाइड्रोजन फ्यूल सेल से चलने वाली यह ट्रेन शुरू में उत्तर रेलवे के जिंद-सोनीपत खंड पर दौड़ेगी। उद्घाटन वाले दिन यह ट्रेन जिंद सिटी, पांडु पिंडारा जंक्शन, ललित खेड़ा हॉल्ट, भम्भेवा, इसापुर खेरी हॉल्ट, बुटाने हॉल्ट, खंडराई हॉल्ट, राब्रा हॉल्ट, लाठ हॉल्ट, मोहना, बरवासनी हॉल्ट और सोनीपत न्यू सहित मध्यवर्ती स्टेशनों और प्रस्तावित ठहरावों पर भी रुकेगी।

रेलवे ने बताया है कि जिस तरह से गाड़ियों में पेट्रोल पंप या सीएनजी भरने की जरूरत होती है और इसके लिए जगह-जगह पंप स्थापिक किये गये हैं। ठीक उसी तरह से हाइड्रोजन ट्रेन में ईंधन भरने की आवश्यकता होती है। इसी उद्देश्य से भारतीय रेलवे ने हरियाणा के जिंद में देश का सबसे बड़ा हरित हाइड्रोजन उत्पादन एवं रिफ्यूलिंग केंद्र स्थापित किया है। यह केंद्र तीन चरणों में संचालित होता है। सबसे पहले हरित हाइड्रोजन संयंत्र में विद्युत अपघटन द्वारा हाइड्रोजन का उत्पादन किया जाता है, जिसमें बिजली का उपयोग करके पानी को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में विभाजित किया जाता है, और फिर इसे विशेष भंडारण टैंकों में सुरक्षित रूप से संग्रहित किया जाता है। दूसरे, हाइड्रोजन को 500 बार तक संपीड़ित किया जाता है, जिससे कम जगह में अधिक मात्रा में हाइड्रोजन संग्रहित किया जा सकता है। आखिर में, इसे दो स्वतंत्र हाइड्रोजन डिस्पेंसर के माध्यम से 350 बार के नियंत्रित दबाव पर वितरित किया जाता है, जिससे दोनों हाइड्रोजन ड्राइविंग पावर कारों को एक साथ ईंधन भरा जा सकता है और टर्नअराउंड समय कम हो जाता है।

रेलवे के अनुसार यह केंद्र एक समय में लगभग 3,000 किलोग्राम हाइड्रोजन का भंडारण करता है, जो ट्रेनसेट के नियमित संचालन को बनाए रखने के लिए पर्याप्त है। इसकी भंडारण और आपूर्ति प्रणाली को पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पीईएसओ) द्वारा अनुमोदित किया गया है।

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