बागलकोट , अप्रैल 03 -- कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने शुक्रवार को तीखा बयान देकर राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया। उन्होंने कहा कि रसोई गैस सिलेंडरों की कमी को लेकर आंदोलन करने वालों को 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के घर का घेराव करना चाहिए'। मुख्यमंत्री ने इस पूरी समस्या के लिए सीधे तौर पर केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया।
बागलकोट में चुनाव प्रचार के दौरान मीडिया से श्री सिद्दारमैया ने कहा कि रसोई गैस सिलेंडरों की उपलब्धता सुनिश्चित करना केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है, जबकि राज्य की भूमिका केवल वितरण तक सीमित है। उनका यह बयान उन खबरों के जवाब में आया, जिनमें कहा गया था कि ऑटो चालक आपूर्ति की समस्याओं को लेकर राज्य के खाद्य मंत्री के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की योजना बना रहे हैं।
यह बयान भाजपा पर किये गये उनके चौतरफा हमले का मुख्य केंद्र बन गया। मुख्यमंत्री ने भाजपा पर जनता को गुमराह करने और उपचुनाव में हार के डर से 'निराधार आरोप' लगाने की कोशिश बताया।
उन्होंने केंद्रीय मंत्री वी सोमन्ना पर भी निशाना साधा, जिन्होंने दावा किया था कि श्री सिद्दारमैया केवल कुछ समय के लिए ही पद पर रहेंगे। इस पर पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सोमन्ना खुद भाजपा में 'बिना काम के मंत्री' हैं और वह कांग्रेस नेतृत्व पर टिप्पणी करने की स्थिति में नहीं हैं।
श्री सिद्दारमैया ने अपने कार्यकाल को लेकर भाजपा नेताओं की बार-बार की जा रही टिप्पणियों को भी खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भाजपा को कांग्रेस के आंतरिक मामलों पर बोलने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने दोहराया, "वे हमारा आलाकमान नहीं हैं और नेतृत्व संबंधी निर्णय का अधिकार केवल कांग्रेस नेताओं के हाथ में हैं।"भाजपा पर दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने श्री बसंतगौड़ा पाटिल यत्नाल का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा ने पूर्व में निष्कासित किये श्री यत्नाल को चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी सौंपी है, जो कर्नाटक में भाजपा की 'हताशा' कोदर्शाता है।
चुनावी संभावनाओं पर मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि कांग्रेस दोनों सीटें जीतेगी। उन्होंने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विजयेंद्र येदियुरप्पा के उन दावों को भी नकार दिया, जिनमें कहा गया था कि उपचुनाव के नतीजों का असर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर पड़ सकता है।
इसके अलावा अल्पसंख्यकों के लिए बजट आवंटन पर हो रही आलोचनाओं का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि वे समान नागरिक हैं और उन्हें उनकी आबादी के अनुपात में धन उपलब्ध कराया गया है।
एक अन्य महत्वपूर्ण टिप्पणी में श्री सिद्दारमैया ने लोकसभा सीटों की प्रस्तावित वृद्धि में दक्षिण से किसी भी 'सौतेले व्यवहार' के प्रति आगाह किया। उन्होंने तर्क दिया कि उत्तरी क्षेत्रों की तुलना में दक्षिण के राज्यों को नुकसान नहीं होना चाहिए।
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