चेन्नई , अक्टूबर 11 -- तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई के पोरूर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वागत कार्यक्रम में तमिल कवि और दार्शनिक संत तिरुवल्लुवर को केसरिया (भगवा) कपड़ों में दिखाए जाने पर एक बार फिर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।

मुख्य विपक्षी पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (द्रमुक) समेत किसी भी राजनीतिक दल ने अभी तक इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है। यह प्रदर्शन श्री मोदी के स्वागत के लिए भाजपा की तैयारियों का हिस्सा था। श्री मोदी कई आधिकारिक कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए राष्ट्रीय राजधानी से चेन्नई आए थे, जिनमें चेन्नई मेट्रो रेल परियोजना के दूसरे चरण के पहले हिस्से का उद्घाटन भी शामिल था। उन्होंने मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय की मौजूदगी में पोरुर से पूनामल्ली बाईपास मेट्रो स्टेशन तक पहली ट्रेन को हरी झंडी दिखाई।

तिरुवल्लुवर को केसरिया कपड़ों में दिखाए जाने पर तमिलनाडु में राजनीतिक नाराजगी देखी गई है क्योंकि इस सम्मानित कवि को किसी खास धार्मिक पहचान से जोड़ने की कोशिशों पर पहले भी आपत्तियां उठाई गई हैं। यह प्रदर्शन श्री मोदी के स्वागत के लिए भाजपा की तैयारियों का हिस्सा था, यह तमिलनाडु का उनका पहला दौरा था, जब से टीवीके सरकार सत्ता में आई है। पिछली द्रमुक सरकार के दौरान तिरुवल्लुवर का 'केसरियाकरण' द्रमुक और भाजपा के बीच विवाद का मुद्दा बन गया था। द्रमुक ने ऐसी तस्वीरों पर आपत्ति जताई थी जिन्हें वह कवि को किसी खास धार्मिक परंपरा से जोड़ने की कोशिश मानती थी। उनका कहना था कि तिरुवल्लुवर तमिल लोगों के लिए एक साझा सांस्कृतिक प्रतीक हैं।

यह विवाद द्रमुक सरकार के कार्यकाल के दौरान तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि के समय में भी उठा था। केसरिया पृष्ठभूमि के साथ तिरुवल्लुवर से जुड़े आधिकारिक कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी की द्रमुक और अन्य वर्गों ने आलोचना की थी और कवि की छवि से जुड़े धार्मिक प्रतीकों पर सवाल उठाए थे।

तिरुवल्लुवर, जिन्होंने तमिल दोहों की रचना 'तिरुक्कुरल' की थी, सदाचार, नैतिकता, शासन और मानवीय रिश्तों पर अपनी शिक्षाओं के लिए सम्मानित हैं।

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