पटना , सितंबर 14 -- ्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन पर लिखी किताबों की लड़ी में मशहूर लेखक मुरली मनोहर श्रीवास्तव की पुस्तक 'मोदी युग का भारत - विकसित देश का संकल्प' शामिल हो रही है, जिसका उद्देश्य देश में तैयार हो रही भावी पीढ़ी को उस ख्वाब से परिचित करवाना है, जिसे श्री मोदी ने 2047 के लक्ष्य के साथ देखा है।
इसे महज इत्तेफाक कहें या कोई अलौकिक संयोग कि इस संसार के शिल्पी भगवान विश्वकर्मा की जयंती भी 17 सितंबर को ही मनाई जाती है। श्री मोदी भी देश की शिल्पकारी में लगे हुए है और उसे आधुनिक स्वरुप देने का अथक प्रयास कर रहे हैं। यह जन्मदिन उनके सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने का गवाह बनेगा और ऐसे अवसर पर उनकी उपलब्धियों की गवाह यह पुस्तक किसी शंखनाद से कम नही है।
इस पुस्तक का शीर्षक ही लेखक के उद्देश्य और संदेश दोनों को स्पष्ट कर देता है। पुस्तक के आरंभ में प्रधानमंत्री मोदी के शुरुआती दिनों की मामूली जानकारी के बाद विषय प्रवेश सीधे उनके प्रधानमंत्रित्व काल में होता है और पुस्तक उनकी उपलब्धियों का आईना बन कर अपने मूल उद्देश्यों पर केंद्रित हो जाती है।
लेखक मुरली श्रीवास्तव ने बातचीत में कहा कि वह प्रधानमंत्री श्री मोदी से संबंधित उन्ही कहानियों को एक बार फिर परोसना नही चाहते थे, जिसे लोग निरंतर पढ़ते आये हैं। उन्होंने कहा कि मोदी का व्यक्तित्व बहुत विराट है और उनकी रुचि बहुत सारे नकारात्मक तथा सकारात्मक पहलुओं की तुलना करने वाले लेखकों की सूची में शामिल होने में नही है।
श्रीवास्तव कहते हैं, इस पुस्तक का पोर पोर सकरात्मकता से भरा हुआ है और उन लोगों को समर्पित है, जो श्री मोदी के 2047 के विकसित भारत के संकल्प में या तो विश्वास रखते हैं या इस यात्रा के पहलुओं को समझ कर खुद भी एक मुसाफिर की तरह शामिल होना चाहते हैं।
दरअसल इस पुस्तक में नरेंद्र मोदी के बारह वर्षों की सकारात्मक यात्रा को संकलित कर यह जताने की कोशिश की गई है कि देश एक निश्चित लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। लेखक के अनुसार विकास की इस यात्रा के सिर्फ आर्थिक पहलू नहीं हैं, बल्कि उन सुधारों पर भी गौर फरमाने की जरूरत है जिनका सरोकार सामाजिक सुधारों और राष्ट्रीय अस्मिता से है।
इस संदर्भ में पुस्तक 2014 के अक्टूबर में शुरू हुए श्री मोदी के रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' से खुद का आगाज करती है और बताती है कि बड़े राजनीतिक पंडितों और विश्लेषकों की गूढ़ गुत्थियो से दूर कैसे प्रधानमंत्री बनते ही नरेंद्र मोदी जनता की चौपाल में जा कर बैठ जाते हैं और उनसे सीधे संवाद करते हैं। इस संवाद ने उन्हें सामाजिक सुधारों के लिए रास्ता दिखाया और धर्म-सम्प्रदाय के ठेकेदारों से बिना डरे निर्णय लेने की ताकत दी। यह पुस्तक स्पष्ट करती है कि देखने में भले सरल लगे, लेकिन तीन तलाक पर प्रहार और तमाम आंतरिक तथा विदेशी दबाव के बावजूद कश्मीर में धारा 370 का क्रिया- कर्म इतना आसान नही थी।
लेखक ने बताया है कि यह जनता से सीधा सम्पर्क ही था, जिसमे श्री मोदी की लोकप्रियता सर चढ़ कर बोली और इतना दुरूह काम चुटकियों में निबट गया। इस फैसले के समय तो कुछ विरोधियों और संविधान विशेषज्ञों का मुंह खुला ही रह गया।
पुस्तक के लेखक मुरली श्रीवास्तव का मानना था कि इन दो सकारात्मक निर्णयों के साथ विश्व मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लगातार उपस्थिति और पड़ोसी देश पाकिस्तान पर सर्जिकल आक्रमण के बाद ऑपरेशन सिंदूर की सीमित लड़ाई के समय आतंकी ठिकानों की बर्बादी ने उन्हें युवाओं का चहेता बना दिया। सोशल पट्टी पर उनके अनुरागियों की बढ़ती संख्या इस बात की ओर इशारा कर रही थी।
लेखक ने इस पुस्तक के माध्यम से बताने का प्रयास किया है कि सामाजिक, धार्मिक और अंतरराष्ट्रीय मुद्दो से दीगर प्रधानमंत्री मोदी का फ़ोकस 2047 ही है। इसमें कहा गया है कि श्री मोदी कैसे देश की प्रगति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना चाहते हैं और 'नारी वंदन अधिनियम' उसी की एक कड़ी है।
यह पुस्तक मोदी के 12 वर्षों में हुई डिजिटल प्रगति, यूपीआई से कैशलेस लेनदेन, जनधन के खातों के उद्भव, बिना बिचौलिए के गरीबों के खाते में सहायता राशि के हस्तांतरण, स्वच्छ भारत,बड़े पैमाने पर गरीबों के लिए मकान तथा शौचालय के निर्माण, उनकी चिकित्सा के लिये आयुष्मान भारत जैसी महत्वाकांक्षी योजना, देश मे सम्पर्क साधनों का विकास, वंदे भारत जैसी विश्वस्तरीय रेलगाड़ी शुरू करने की हकीकत से लेकर बुलेट ट्रेन के ख्वाब के दर्शन कराती है।
पुस्तक में कोरोना काल मे देशवासियों की सुरक्षा, वैक्सीन निर्माण, दुनिया को मदद और देश की अर्थव्यवस्था में त्वरित रिकवरी के ट्रेंड को भी सामने रखा गया है।
इस पुस्तक के आखिर में मोदी के बारे में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया, मेलोनी, इजरायल के राष्ट्राध्यक्ष बेंजामिन नेतन्याहू सहित कई प्रमुख नेताओं के विचार कोट किये गए हैं और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, वर्तमान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के प्रधानमंत्री श्री मोदी पर लिखे लेख संकलित किये गए हैं।
कुल मिला कर मुरली मनोहर श्रीवास्तव की यह पुस्तक मोदी काल की उपलब्धियों और उनके भविष्य के विजन का आईना कही जा सकती है।
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