तिरुवनंतपुरम , फरवरी 11 -- मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव एम.ए. बेबी ने आरोप लगाया है कि केरल में वामपंथी सरकार को हराने के बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हालिया बयान राज्य में कम्युनिस्ट आंदोलन को कमजोर करने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की देशव्यापी योजना का हिस्सा हैं।
एक बयान में श्री बेबी ने कहा कि आरएसएस ने अपने शताब्दी समारोह के दौरान छह-सात फरवरी को मुंबई में एक राष्ट्रीय स्तर की बैठक आयोजित की थी, जहाँ 'न्यू होराइजन्स' शीर्षक के तहत नये रणनीतिक लक्ष्य अपनाये गये थे। उन्होंने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की टिप्पणियों को इसी वैचारिक एजेंडे की निरंतरता बताया।
माकपा नेता ने आठ फरवरी को राज्यसभा में प्रधानमंत्री के भाषण का जिक्र करते हुए कहा कि श्री मोदी ने राज्यसभा सदस्य श्री सदानंदन की प्रशंसा की और वामपंथी विचारधारा को 'प्रतिगामी' और 'सिमटती हुई' बताया, जिसका उद्देश्य वामपंथ को अवैध ठहराना और सार्वजनिक जीवन में उसकी भूमिका को कम करना था।
श्री बेबी ने उसी दिन छत्तीसगढ़ में एक सार्वजनिक सभा में गृह मंत्री के भाषण का भी हवाला दिया, जहाँ श्री शाह ने कम्युनिस्ट पार्टियों पर विकास देने में विफल रहने का आरोप लगाया था और दावा किया था कि त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल में वामपंथ पहले ही खत्म हो चुका है। उन्होंने यह भी कहा था कि केरल अंतिम बचा हुआ वामपंथी गढ़ है और आगामी चुनावों में यह भी ढह जाएगा।
श्री बेबी ने आरोप लगाया, "केरल में कम्युनिस्टों की हार आरएसएस का एक प्रमुख राष्ट्रीय एजेंडा बन गया है।" उन्होंने आरएसएस के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर राजनीतिक और वैचारिक माध्यमों से केरल में वामपंथी आंदोलन को पूरी तरह से खत्म करने की कोशिश करने का आरोप लगाया।
माकपा महासचिव ने आरोप लगाया कि केरल में कांग्रेस परोक्ष रूप से इस एजेंडे में मदद कर रही है। उन्होंने कहा कि यह केवल अल्पकालिक राजनीतिक लाभ के लिए नहीं है, बल्कि उनके साझा सामाजिक आधार और दक्षिणपंथी आर्थिक एवं राजनीतिक दृष्टिकोण के साथ मेल खाने के कारण है।
श्री बेबी के अनुसार, भाजपा और कांग्रेस दोनों केवल इस बात पर अलग हैं कि किसने पहले कॉर्पोरेट-समर्थक, नव-उदारवादी आर्थिक नीतियां पेश कीं, जबकि सांप्रदायिकता और जातिगत प्रभुत्व को जगह देने के मामले में दोनों की समझ एक जैसी है।
माकपा नेता ने दावा किया कि केरल में जमीनी स्तर पर आरएसएस और कांग्रेस अक्सर घनिष्ठ संबंध रखते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि केरल प्रदेश कांग्रेस समिति (केपीसीसी) के एक पूर्व अध्यक्ष ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि कांग्रेस ने आरएसएस शिविरों की रक्षा की थी। उन्होंने कहा कि आरएसएस और कांग्रेस दोनों के लिए माकपा ही मुख्य दुश्मन बनी हुई है।
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