जोधपुर , सितंबर 13 -- राजस्थान के शुष्क क्षेत्रों की प्रमुख दलहनी फसल 'मोठ' ने इस वर्ष अल नीनो के प्रभाव और 35 दिनों के लंबे सूखे के बावजूद उत्कृष्ट पैदावार और पर्यावरण अनुकूलता का प्रदर्शन किया है।
यहां रविवार को जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति में यह जानकारी दी गयी। इसमें बताया गया है कि केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी), जोधपुर ने मोठ दाल की कुछ नई किस्मों काजरी मोठ-4, काजरी मोठ-5, काजरी मोठ-6 और काजरी मोठ-7 का विकास किया है। इन किस्मों ने खरीफ 2026 के दौरान 35 दिनों की लंबी शुष्क अवधि (3 अगस्त से 7 सितंबर 2026) के बावजूद खेत के स्तर पर अपनी मजबूत प्रतिरोधक क्षमता साबित की है। इस दौरान सतह की नमी 15-16 फीसदी से घटकर 5-6 प्रतिशत तक गिर जाने के बाद भी इन किस्मों में फूल आने, फलियां बनने और पौधों के हरे-भरे रहने की प्रक्रिया निरंतर जारी रही।
इन किस्मों की सबसे बड़ी विशेषता उनका विकासात्मक अनुकूलन है। ये पौधे बुआई के लगभग 30 दिन बाद ही फूल देने लगते हैं और उपलब्ध नमी के अनुसार अपने विकास और परिपक्वता को समायोजित कर लेते हैं। खेत में इस बेहतर प्रदर्शन को उचित कृषि प्रबंधन से भी समर्थन मिला, जिसमें जुलाई में मानसून की शुरुआत के साथ समय पर बुआई, अनुकूलतम पौधा अंतराल और नमी संरक्षण के लिए बुआई के 20 दिन बाद निराई-गुड़ाई जैसे कदम शामिल रहे। इन किस्मों के बेहतर परिणाम कम उपजाऊ मिट्टी में भी हासिल किए गए हैं।
काजरी अपने अनुसंधान फार्म के सात हेक्टेयर क्षेत्र में इन किस्मों का बीज उत्पादन कर रही है ताकि 'साथी पोर्टल' के जरिए 23.32 क्विंटल बीज की मांग को पूरा किया जा सके। राजस्थान राज्य बीज निगम और राष्ट्रीय बीज निगम के सहयोग से इन बीजों का गुणन और विपणन किया जा रहा है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगर इन किस्मों को व्यापक रूप से अपनाया जाता है, तो यह राजस्थान में मोठ के कुल खेती योग्य क्षेत्र के 25 प्रतिशत हिस्से को कवर कर सकती हैं।
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