नई दिल्ली , अप्रैल 7 -- पश्चिम एशिया और पश्चिमी देशों की कठिन परिस्थितियों के मद्देनज वित्त और निवेश के कारोबार में लगे वैश्विक संगठन मॉर्गन स्टेनली ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत के वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में वृद्धि के अनुमान को प्रतिशत 0.30 अंक घटाकर 6.2 प्रतिशत कर दिया है।
इससे पहले संगठन ने 6.5 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान लगाया था। मॉर्गन स्टेनली का अनुमान है कि 2026-27 में कच्चे तेल की औसत कीमत 95 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल रहेगी तथा गैस की उपलब्धता एक अतिरिक्त बाधा होगी। मॉर्गन स्टेनली की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि ईंधन की बढ़ती कीमत और औद्योगिक आपूर्ति में कमी से उत्पादन के संसाधनों की लागत बढ़ रही हैं और चुनिंदा वस्तुओं के उत्पादन में कटौती करनी पड़ रही है। रुपये की कमजोरी के बीच आयातित महंगाई बढ़ रही है।
मॉर्गन स्टेनली ने आगे कहा कि उत्पादन की उच्च लागत, मुद्रा की कमजोरी और खाद्य/मुख्य वस्तुओं की कीमतों में मजबूती के कारण वित्त वर्ष 27 में औसत खुदरा मुद्रास्फीति साल-दर-साल आधार पर बढ़कर 5.1 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि तेल की ऊंची कीमतों के कारण वित्त वर्ष 2026-27 में चालू खाते का घाटा (कैड) प्रतिशत लगभग 1.50 अंक बढ़कर जीडीपी के लगभग 2.5 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। मॉर्गन स्टेनली के विश्लेषकों ने कहा है, "हाल के वर्षों में पूंजी प्रवाह वित्तपोषण की जरूरतों से पीछे रहा है, इसलिए हमें उम्मीद है कि भुगतान संतुलन लगातार तीसरे वर्ष घाटे में रहेगा, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ने की आशंका बढ़ जाएगी।"मॉर्गन स्टेनली की भारत संबंधी मामलों की मुख्य अर्थशास्त्री उपासना चाचरा," ने बानी गंभीर और श्रेया सिंह के साथ मिलकर लिखा है, "इस पृष्ठभूमि में, हमने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपने वास्तविक जीडीपी अनुमान को प्रतिशत 0.30 अंक घटाकर 6.2 प्रतिशत कर दिया है। इससे पहले, हम वृद्धि के लिए जोखिमों पर नज़र रख रहे थे । हमें उम्मीद है कि जून 2026 में समाप्त होने वाली तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर एक साल के न्यूनतम स्तर 5.9 प्रतिशत (साल-दर-साल) पर पहुंच जाएगी, क्योंकि औद्योगिक गतिविधियां धीमी पड़ेंगी, मार्जिन कम होगा और बाहरी वित्तपोषण कठिन हो जाएगा।' मार्च 2026 की तिमाही में वास्तविक जीडीपी वृद्धि 7.4 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2026-27 में लगभग 7 प्रतिशत रहने का अनुमान था।
रिपोर्ट मे कहा गया है , ".. इसके बाद, जैसे-जैसे आपूर्ति संबंधी झटके कम होंगे और नीतिगत समर्थन का असर दिखेगा, विकास दर धीरे-धीरे सामान्य हो जाएगी।" हाल ही में, मूडीज़ रेटिंग्स ने भी पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को पहले के 6.8 प्रतिशत से घटाकर 6 प्रतिशत कर दिया है। आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) ने भी चालू वित्त वर्ष में भारत की वृद्धि के अनुमान को 6.1 प्रतिशत रखा है जबकि 2025-26 में यह 7.6 प्रतिशत थी। इसी तरह ईवाई ने यह भी कहा कि चालू वित्त वर्ष में भारत की वास्तविक जीडीपी में वृद्धि मौजूदा वैश्विक संकटों के प्रभाव से लगभग एक प्रतिशत अंक तक कम हो सकती है, जबकि खुदरा मुद्रास्फीति उनके आधारभूत अनुमानों से प्रतिशत लगभग 1.5 अंक तक बढ़ सकती है।
रेटिंग एजेंसी इक्रा ने अनुमान लगाया है कि ऊर्जा की ऊंची कीमतों के प्रतिकूल प्रभाव के कारण वित्त वर्ष 2026- 27 में भारत की वृद्धि धीमी होकर 6.5 प्रतिशत रह सकती है।
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