मैसूरु , अगस्त 26 -- कैप्टन अभिमन्यु इस साल कर्नाटक में प्रसिद्ध मैसूरु दशहरा समारोह के दौरान नजर नहीं आएगा। छह बार सोने का हौदा (अंबारी) उठाने वाले इस हाथ को बुधवार को हुंसूर तालुक के वीरनाहोसहल्ली में औपचारिक विदाई दी गयी। यहां पर 2026 के दशहरा के लिए 'गजपायना' (हाथियों का जुलूस) शुरू हो गया।
यह विदाई 60 साल के उस हाथी के लिए एक युग के अंत जैसा था, क्योंकि वह सोने का हौदा उठाने के लिए तय उम्र सीमा पार कर चुका है। अभिमन्यु ने लगातार छह दशहरा समारोहों में सफलतापूर्वक अंबारी उठाई थी और 'जंबो सवारी' के मुख्य आकर्षणों में से एक बन गया था। विदाई समारोह के हिस्से के तौर पर वीरनाहोसहल्ली में उसे खास तौर पर सजाया गया था। हाथी को रंग-बिरंगे पारंपरिक डिजाइनों से सजाया गया था, जिसमें उसकी सूंड पर राज्य का प्रतीक 'गंडाबेरुंडा' और कानों पर शंख और चक्र के डिजाइन शामिल थे।
'गजपायना', जो पारंपरिक रूप से दशहरा समारोह के लिए मैसूरु की ओर हाथियों के जाने की औपचारिक शुरुआत का प्रतीक है, बुधवार को वीरनाहोसहल्ली से शुरू हुआ। हालांकि, अभिमन्यु की गैर-मौजूदगी में इस साल का समारोह थोड़ा फीका लग रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, हालांकि वन विभाग ने उम्र की वजह से उसे अंबारी उठाने की इजाजत नहीं दी, लेकिन उसे निशाने (औपचारिक) हाथी के तौर पर बनाए रखने का प्रस्ताव था।
खबर है कि मंत्री ईश्वर खंड्रे ने अधिकारियों को पत्र लिखकर मांग की थी कि अभिमन्यु को औपचारिक हाथी के तौर पर बने रहने दिया जाए। हालांकि, वन विभाग ने यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया। वर्ष 2026 का मैसूरु दशहरा समारोह अब उस अनुभवी हाथी के बिना आगे बढ़ेगा जो 'जंबो सवारी' की पहचान बन गया था। हाथियों की पारंपरिक सजावट, जिसमें उनकी सूंड, कानों और पैरों पर रंग-बिरंगी पेंटिंग की जाती है, तैयारियों का हिस्सा है क्योंकि हाथी दल मैसूरु की ओर अपनी यात्रा शुरू कर रहा है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित