मुरादाबाद , मार्च 24 -- मुरादाबाद के बहुचर्चित मैनाठेर दंगा मामले में करीब 15 वर्ष बाद अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए 16 आरोपियों को दोषी करार दिया है। कोर्ट ने 14 दोषियों को तत्काल हिरासत में लेकर जेल भेजने के आदेश दिए, जबकि दो आरोपी सुनवाई के दौरान अनुपस्थित रहे। सजा का ऐलान अब 27 मार्च को किया जाएगा।
अभियोजन अधिकारी के अनुसार, वर्ष 2011 में मैनाठेर थाना क्षेत्र के डींगरपुर गांव में हुए दंगे के मामले की सुनवाई अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे-2) की अदालत में चल रही थी। साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया।
यह घटना 6 जुलाई 2011 को उस समय हुई थी, जब पुलिस एक छेड़छाड़ के आरोपी की गिरफ्तारी के लिए गांव पहुंची थी। इसी दौरान धार्मिक पुस्तक के अपमान की अफवाह फैलने से माहौल बिगड़ गया और हिंसा भड़क उठी।
उग्र भीड़ ने तत्कालीन डीआईजी अशोक कुमार सिंह पर जानलेवा हमला किया। भीड़ ने उन्हें घेरकर उनकी सरकारी पिस्टल छीन ली, वर्दी फाड़ दी और बुरी तरह पीटा, जिससे उन्हें कई फ्रैक्चर आए और लंबे समय तक गंभीर स्थिति में रहे। उस दौरान तत्कालीन जिलाधिकारी राजशेखर पर भी हमला हुआ था।
दंगे के दौरान भीड़ ने मुरादाबाद-संभल मार्ग को जाम कर दिया था और मैनाठेर थाने, पुलिस चौकी तथा पीएसी के वाहनों में आगजनी की गई थी, जिससे हालात बेहद गंभीर हो गए थे।
पुलिस ने इस मामले में परवेज आलम समेत 25 लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। सुनवाई के दौरान तीन आरोपियों की मृत्यु हो गई, जबकि छह नाबालिगों के मामले किशोर न्याय बोर्ड में विचाराधीन रहे। शेष आरोपियों में से 16 को दोषी ठहराया गया है। सरकारी अधिवक्ताओं ब्रजराज सिंह और नितिन गुप्ता के अनुसार, अदालत के आदेश पर 14 दोषियों को मेडिकल परीक्षण के बाद जेल भेज दिया गया है।
करीब डेढ़ दशक पुराने इस संवेदनशील मामले में आए इस फैसले को न्याय की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। अब सभी की नजरें 27 मार्च को होने वाले सजा के ऐलान पर टिकी हैं।
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