शिलांग , मार्च 27 -- मेघालय उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने राज्य सरकार के उस निर्णय को रद्द कर दिया है, जिसके तहत मदिरा के खुदरा विक्रेताओं के लाभ मार्जिन को 20 प्रतिशत से घटाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया था।

न्यायमूर्ति हमरसन सिंह थांगखियू और न्यायमूर्ति बिस्वदीप भट्टाचार्जी की पीठ ने 'ईस्ट खासी हिल्स वाइन डीलर्स वेलफेयर एसोसिएशन' की एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए इस कदम को असंवैधानिक और मनमाना करार दिया।

न्यायालय ने कहा राज्य सरकार अपनी नई डिजिटल ट्रैकिंग प्रणाली के लिए पैसों का इंतजाम मदिरा विक्रेताओं के लाभ मार्जिन में से काट कर नहीं कर सकती। इस मामले में याचिकाकर्ताओं ने सरकार की 'एकीकृत उत्पाद शुल्क प्रबंधन प्रणाली' को चुनौती दी थी। यह क्यूआर-कोड और होलोग्राम के माध्यम से शराब की बोतलों की ट्रैकिंग करती है। इस प्रणाली को लागू करने के लिए प्रति बोतल लगभग चार-पांच प्रतिशत का अतिरिक्त खर्च आ रहा था, जिसे अंततः खुदरा विक्रेताओं पर डाल दिया गया और उनका मुनाफा पांच प्रतिशत कम कर दिया गया।

सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल अमित कुमार ने तर्क दिया कि मदिरा व्यापार करना एक विशेषाधिकार है, मौलिक अधिकार नहीं, और राज्य को इसे विनियमित करने का पूर्ण अधिकार है। सरकार ने यह भी तर्क दिया कि आईईएमएस नीति पारदर्शिता सुनिश्चित करने और राजस्व की चोरी रोकने के लिए बनाई गई थी।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित