शिलांग , जुलाई 30 -- मेघालय सरकार ने केंद्र से प्रस्ताव किया है कि वह भारत-बंगलादेश सीमा के 150 गज के दायरे में आने वाली ज़मीन का अधिग्रहण करे, ताकि सीमा पर आसानी से तारबंदी की जा सके और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ायी जा सके।
गृह विभाग के प्रभारी उपमुख्यमंत्री प्रेस्टोन टिनसोंग ने कहा कि राज्य सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) को पत्र लिखकर सीमा पर तारबंदी का काम पूरा करने के लिए ज़मीन के पूर्ण अधिग्रहण पर विचार करने को कहा है।
मेघालय की खासी और जयंतिया पहाड़ियों में भारत- बंगलादेश सीमा के एक हिस्से में ज़मीन मालिकों ने ज़ीरो लाइन से 150 गज दूर तारबंदी करने का विरोध किया है। उनका तर्क है कि ऐसा करने से उनकी खेती की बहुत सारी ज़मीन चली जायेगी।
श्री टिनसोंग ने कहा, "हम तारबंदी के बिल्कुल भी खिलाफ नहीं हैं, लेकिन हमारे लोग चाहते हैं कि तारबंदी अंतरराष्ट्रीय सीमा के ज़ीरो पॉइंट से की जाये, ताकि उनके गाँव और खेत प्रस्तावित तारबंदी के दायरे से बाहर रहें।"उपमुख्यमंत्री ने बताया, "हमने भारत सरकार के सामने यह मुद्दा उठाया है और उनसे कहा है कि अगर 150 गज की दूरी वाली फेंसिंग की शर्त में कोई बदलाव नहीं हो सकता, तो क्यों न उस पूरी ज़मीन को सीधे खरीद लिया जाए, ताकि गाँव वाले और किसान वहाँ से दूसरी जगहों पर जा सकें।"श्री टिनसोंग के अनुसार इससे आबादी वाले इलाकों को बाड़ के दूसरी तरफ छोड़े बिना ही सीमा पर बाड़ लगाने का काम पूरा किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि इस कदम से निगरानी भी मज़बूत होगी और अंतरराष्ट्रीय सीमा का कुल प्रबंधन भी बेहतर होगा।
भारत-बांग्लादेश 2015 के भूमि सीमा समझौते के तहत दोनों देशों ने ज़मीन की अदला-बदली करके सीमा विवाद सुलझाया था, जिसमें एन्क्लेव (यानी दूसरे देश के कब्ज़े वाले इलाके) भी शामिल थे। दोनों देश इस बात पर भी सहमत हुए हैं कि सीमा पर बाड़ 150 गज या लगभग 137 मीटर दूर लगायी जायेगी, क्योंकि बंगलादेश इस बाड़ को रक्षा प्रतिष्ठान मानता है और द्विपक्षीय समझौते के तहत इसकी इजाज़त नहीं है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मेघालय सरकार को बाड़ लगाने का काम तेज़ी से करने का निर्देश दिया था, क्योंकि यह इलाका उग्रवादियों की घुसपैठ और अवैध प्रवासन के लिहाज़ से संवेदनशील था।
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