शिलांग , जुलाई 19 -- नीति आयोग के पहले 'निवेश सुगमता सूचकांक' (आईएफआई) के 'रेगुलेटरी ईज' श्रेणी में मेघालय ने सभी पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों में पहला स्थान हासिल किया है।
नीति आयोग द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, मेघालय ने इस श्रेणी में 10 में से 8.5 अंक हासिल किए हैं। इसके बाद नगालैंड और त्रिपुरा 8.2 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहे, जबकि हिमाचल प्रदेश ने 7.9 अंक हासिल किए। असम और उत्तराखंड 7.7 अंकों के साथ अगले स्थान पर रहे।
इस श्रेणी के अंतर्गत यह मापा जाता है कि राज्यों के नियम-कानून निवेश को किस तरह प्रभावित करते हैं। इसमें नियमों का पालन करने की प्रक्रिया, पारदर्शिता, नीतियों की स्पष्टता और स्थिरता, तथा निवेशकों की नजर में राज्य के नियामक माहौल का आकलन किया जाता है।
इस श्रेणी के तहत उद्यम शुरू करने में लगने वाले समय, आवश्यक लाइसेंसों की संख्या, बिजली और पानी के कनेक्शन के लिए मिलने वाली मंजूरी, औद्योगिक भूमि आवंटन, पर्यावरणीय मंजूरी और एकल-खिड़की मंजूरी जैसे जैसे कारकों का मूल्यांकन किया जाता है।
इसमें सिंगल-विंडो मंजूरी प्रणाली की प्रभावशीलता, नियामक प्रक्रियाओं पर निवेशकों की राय, वाणिज्यिक अदालतों की कार्यक्षमता और कारोबार बंद करने या समेटने में लगने वाले समय का भी आकलन किया जाता है।
यह सूचकांक ' 2047 तक विकसित भारत' के दृष्टिकोण को पूरा करने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने और निरंतर सुधार करने के लिए प्रोत्साहित करके प्रतिस्पर्धी और सहकारी संघवाद को बढ़ावा देने का भी प्रयास करता है।
नीति आयोग ने कहा कि सुव्यवस्थित प्रणाली वाले राज्य अनिश्चितता को कम करते हैं और व्यापार करने में लगने वाले समय तथा लागत को घटाते हैं, जिससे वे निवेश के लिए अधिक आकर्षक गंतव्य बनते हैं।
रेगुलेटरी ईज में क्षेत्र में सबसे आगे रहने के बावजूद, मेघालय को समग्र इन्वेस्टमेंट फ्रेंडलीनेस इंडेक्स में 'उभरते प्रदर्शनकर्ता' की श्रेणी में रखा गया है, जो यह दर्शाता है कि राज्य के पास अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सुधार की गुंजाइश है।
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