शिलॉन्ग , अप्रैल 16 -- मेघालय सरकार ने अंग्रेजी के बाद खासी और गारो को आधिकारिक भाषाओं के रूप में मान्यता दे दी है।
इस आशय की मंजूरी गुरुवार को यहां हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में दी गयी। मुख्यमंत्री कॉनरैड संगमा ने बताया कि इस फैसले के साथ मेघालय राज्य भाषा अधिनियम 2005 निरस्त हो गया है।
श्री संगमा ने कैबिनेट के फैसले को ऐतिहासिक और 'बेहद अहम' फैसला करार देते हुए कहा कि यह अध्यादेश राज्य के युवाओं के लिए नये अवसर पैदा करेगा और साथ ही राज्य की भाषाओं को बढ़ावा देगा।
उन्होंने कहा कि इस अध्यादेश का मुख्य उद्देश्य अंग्रेजी के अलावा खासी और गारो को राज्य की आधिकारिक भाषा बनाना है। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी राज्य की आम भाषा रहेगी। राज्य सरकार की ओर से जारी होने वाली अधिसूचनाएं अंग्रेजी, खासी और गारो में होंगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार का यह आदेश प्रतियोगी परीक्षाओं पर भी लागू होगा, हालांकि इसे चरणबद्ध तरीके से पूरी तरह लागू किया जाएगा।
श्री संगमा ने बताया कि समय के साथ मेघालय राज्य विधानमंडल (अंग्रेजी भाषा का विस्तार) अधिनियम 1980 में भी बदलाव किये जाएंगे और इसके बाद जनप्रतिनिधि विधानसभा में खासी एवं गारो में भी चर्चा कर सकेंगे।
श्री संगमा ने मेघालय आधिकारिक भाषा अध्यादेश 2026 को राज्य की आठवीं अनुसूची में शामिल होने की मांग को लेकर कहा कि कैबिनेट ने इस अध्यादेश को प्राथमिक रूप से इसलिए मंजूरी दी है क्योंकि खासी और गारो को आठवीं अनुसूची में शामिल करना मेघालय विधानसभा की मांगों में शामिल है।
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