मेलिम , अक्टूबर 20 -- मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा ने मंगलवार को कहा कि मेघालय का शहद दुनिया में सबसे अच्छा है और अगर इसका उचित तरीके से उत्पादन हो और बाजार में बेहतर तरीके से बेचा जाए तो इस काम में असीम संभावनाएं हैं।

दक्षिण पश्चिम गारो हिल्स जिले के रेरापारा ब्लॉक के मेलिम में एक 'एपिकल्चर मल्टी फैसिलिटी सेंटर सह प्रोसेसिंग यूनिट' का उद्घाटन करते हुए श्री संगमा ने कहा कि सरकार राज्य में एक 'मधुमक्खी संग्रहालय एवं केंद्र' स्थापित करने पर विचार कर रही है, जहाँ जैविक और सर्वोत्तम शहद बेचा जा सके तथा शहद उत्पादन की डिजिटल जानकारी प्रदर्शित की जा सके। इस अवसर पर एनपीपी विधायक डॉ. मेहताब चांदी संगमा, संजय संगमा और सुबीर मराक भी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कार्यक्रम रेरापारा में विकास के तीन महत्वपूर्ण क्षेत्रों ग्रामीण आजीविका, संपर्क और सरकारी सेवाओं तक पहुंच को एक साथ जोड़ता है। उन्होंने सभा को संबोधित करते हुए कहा, " यह केंद्र वैज्ञानिक उत्पादन, तकनीकी प्रशिक्षण, मूल्य संवर्धन और बाजार पहुंच में मदद करके मधुमक्खी पालन को मजबूत करेगा। इससे इसे एक अधिक संगठित आय स्रोत और ग्रामीण उद्यम के रूप में विकसित करने में मदद मिल सकती है।"मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि कार्य संचालन का ध्यान केवल बक्से वितरित करने से आगे बढ़कर कॉलोनी प्रबंधन, गुणवत्ता नियंत्रण, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और संगठित बाजार पहुंच तक होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी 12 जिलों में 87 क्लस्टरों और 6,491 मधुमक्खी पालकों को कवर करते हुए तीन चरणों में 'मधुमक्खी मिशन 2.0' लागू किया जा रहा है।

श्री संगमा ने कहा कि मिशन के तहत 32,455 मधुमक्खी के बक्से और 6,491 उपकरण सेट उपलब्ध कराए गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक मधुमक्खी पालक को पांच मधुमक्खी के बक्से और एक उपकरण सेट मिलता है और तृतीय चरण के तहत कवर किए गए 39 क्लस्टरों ने 2024-25 के दौरान 157.69 टन शहद का उत्पादन किया।

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य ने उत्तर गारो हिल्स जिले के संब्रक में प्रशिक्षण, परीक्षण, प्रसंस्करण, हाइव-मैन्युफैक्चरिंग, भंडारण, खुदरा और सूचना सुविधाओं के साथ एक 'एकीकृत मधुमक्खी विकास केंद्र' भी स्थापित किया है। उन्होंने बताया कि दक्षिण पश्चिम गारो हिल्स जिला मल्टी-फैसिलिटी मॉडल कच्चे शहद के संग्रह, प्रसंस्करण, बॉटलिंग और परीक्षण, विपणन तथा मधुमक्खी-बॉक्स निर्माण के माध्यम से कटाई के बाद की आवश्यकताओं को पूरा करता है। इस परियोजना की लागत लगभग 1.52 करोड़ रुपये है।

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