बेंगलुरु , जुलाई 31 -- लंबे समय से लंबित मेकेदातु परियोजना के ताजा घटनाक्रम में केंद्र सरकार ने कर्नाटक द्वारा प्रस्तावित 'मेकेदातु संतुलन जलाशय एवं पेयजल परियोजना' की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट को वापस लौटा दिया है।
केंद्र ने गुरुवार को यह जानकारी देते हुए कहा कि राज्य सरकार को कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण के फैसले और केंद्रीय जल आयोग के नवीनतम दिशा-निर्देशों के अनुरूप संशोधित कर दोबारा प्रस्तुत करे।
जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने स्पष्ट किया कि निर्धारित मानदंडों का पालन करते हुए नया प्रस्ताव प्राप्त होने के बाद ही इस पर आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। श्री चौधरी ने कहा कि संशोधित डीपीआर प्रस्तुत किए जाने और स्थापित तकनीकी एवं कानूनी ढांचे के तहत उसकी जांच के बाद ही अंतर-राज्यीय नदी परियोजना का मूल्यांकन किया जाएगा।
श्री चौधरी ने कहा कि केंद्र सरकार ने तमिलनाडु सरकार और किसान संगठनों द्वारा उठाई गई आपत्तियों पर भी ध्यान दिया है, जिन्होंने आशंका व्यक्त की है कि प्रस्तावित जलाशय से कावेरी डेल्टा और निचले तटीय क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा कि अंतर-राज्यीय नदियों की परियोजनाओं के मूल्यांकन प्रक्रिया में ऐसी चिंताओं को शामिल किया जाता है।
कानूनी स्थिति को स्पष्ट करते हुए मंत्री ने कावेरी विवाद पर उच्चतम न्यायालय के 16 फरवरी 2018 के फैसले का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि कर्नाटक को अपने क्षेत्र में जलाशय का निर्माण करने के लिए निचले राज्यों तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी की सहमति प्राप्त करने की आवश्यकता नहीं है। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसी किसी भी परियोजना को सीडब्ल्यूडीटी के फैसले और लागू वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप होना चाहिए।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित