चेन्नई , जुलाई 30 -- मद्रास उच्च न्यायालय ने गुरुवार को तमिलनाडु के मुख्य सचिव, विधानसभा सचिव और केंद्र सरकार को नोटिस जारी करने का आदेश दिया। यह आदेश कावेरी नदी पर कर्नाटक के प्रस्तावित मेकेदातु बांध परियोजना के खिलाफ राज्य विधानसभा के प्रस्ताव में किए गए संशोधनों को चुनौती देने वाली याचिका पर दिया गया।
अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (अन्ना द्रमुक) के सचेतक एग्री एस.एस. कृष्णमूर्ति ने मेकेदातु मुद्दे पर फैसला करने के लिए एक अलग न्यायाधिकरण बनाने का सुझाव देने वाले संशोधन को रद्द करने की मांग करते हुए याचिका दायर की है। जब इस याचिका पर सुनवाई हुई, तो मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और न्यायाधीश जी. अरुलमुुरुगन की पीठ ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने का आदेश दिया और इसके लिए दो हफ़्ते के समय निर्धारित किया और सुनवाई स्थगित कर दी।
कर्नाटक के मेकेदातु बांध का विरोध करने वाला प्रस्ताव 19 जून को राज्य विधानसभा में सर्वसम्मति से पारित किया गया था। द्रमुक ने बहस में हिस्सा लिया और पूरा समर्थन देने का वादा किया, लेकिन वोटिंग के दौरान सदन से बाहर चली गयी।
बहस के दौरान द्रमुक के विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने न्यायाधीकरण बनाने का सुझाव दिया था, जिसे मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने स्वीकार कर लिया और प्रस्ताव को ध्वनि मत से पारित कर दिया गया।
याचिका में अन्ना द्रमुक ने आरोप लगाया है कि संशोधन उस मूल प्रस्ताव का हिस्सा नहीं था जो विधायकों को भेजा गया था और इसे बिना ठीक से बहस किए ही अपना लिया गया। पार्टी ने यह भी दावा किया कि पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) जैसी पार्टियों की आपत्तियों के बावजूद, बाद में केंद्र को यह प्रस्ताव इस तरह भेजा गया जैसे इसे सर्वसम्मति से पारित किया गया हो।
उल्लेखनीय है कि तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) के नेतृत्व वाली सरकार के पहले सत्र के दौरान, तमिलनाडु विधानसभा ने कावेरी नदी पर मेकेदातु में नया बांध बनाने के कर्नाटक सरकार के प्रस्ताव का कड़ा विरोध करते हुए सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया था। साथ ही, केंद्र से 'अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956' के तहत विवाद को सुलझाने के लिए एक नया ट्रिब्यूनल बनाने का आग्रह भी किया था।
मुख्यमंत्री द्वारा पेश किए गए इस प्रस्ताव को सर्वसम्मति से अपनाया गया। इसमें सत्ताधारी टीवीके की सहयोगी कांग्रेस, मुख्य विपक्षी पार्टी द्रमुक और अन्ना द्रमुक सहित विभिन्न दलों के नेताओं ने अपना पूरा समर्थन दिया। हालांकि, जब प्रस्ताव पारित हुआ, तो सदन में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का एकमात्र सदस्यमौजूद नहीं था।
प्रस्ताव पेश करते हुए श्री विजय ने कहा कि उनकी सरकार कर्नाटक सरकार द्वारा बांध निर्माण की दिशा में आगे बढ़ने के कदम को रोकने के लिए हर संभव प्रयास करेगी। उन्होंने पड़ोसी राज्य के उस एकतरफा प्रयास का भी कड़ा विरोध किया जिसके तहत वह कावेरी जल विवाद न्यायाधीकरण के अंतिम फैसले का उल्लंघन करते हुए और निचले बहाव वाले राज्यों तथा केंद्र सरकार की सहमति के बिना मेकेदातु में बांध बनाना चाहता है।
उन्होंने कर्नाटक के कदम को अस्वीकार्य बताते हुए केंद्र से अपील की कि वह इस बांध परियोजना के लिए तकनीकी और पर्यावरणीय मंज़ूरी समेत कोई भी मंज़ूरी न दे। श्री विजय ने इस बात पर भी चिंता जताई कि तमिलनाडु-कर्नाटक सीमा के पास प्रस्तावित जलाशय से तमिलनाडु में पानी का प्राकृतिक बहाव रुक सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे कदम से कावेरी डेल्टा क्षेत्र में सिंचाई पर बुरा असर पड़ेगा और खेती के लिए समय पर पानी मिलने पर निर्भर लाखों किसान प्रभावित होंगे।
सरकार के संकल्प को दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि तमिलनाडु इस परियोजना को रोकने के लिए सभी संभव कानूनी और राजनीतिक उपाय करेगा। उन्होंने कहा कि वह पहले ही केंद्र सरकार से बांध बनाने के लिए कर्नाटक की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर ) को खारिज करने का आग्रह कर चुके हैं।
गौरतलब है कि 234 सदस्यों वाली विधानसभा में मौजूदा समय में अध्यक्ष समेत कुल 233 सदस्य हैं। इनमें से 145 विधायकों ने वोटिंग में हिस्सा लिया, जिसमें से टीवीके के 107 विधायक और सहयोगी पार्टियों कांग्रेस (5), वीसीके, आईयूएमएल, सीपीआई और माकपा के क्रमश: 2-2 सदस्य ,और अन्ना द्रमुक के 25 बागी विधायक शामिल थे। वहीं, अन्ना द्रमुक की सहयोगी पीएमके (4 सदस्य) और भाजपा (एक सदस्य) ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया। इसके अलावा 59 विधायकों वाली द्रमुक और उसकी सहयोगी डीएमडीके (एक विधायक) ने सदन से बहिर्गमन किया।
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