नयी दिल्ली , सितंबर 17 -- कार्बन क्रेडिट प्रणाली के तहत पंजाब और हरियाणा में 2,500 से अधिक छोटे किसानों को पर्यावरण अनुकूल खेती के तरीकों को अपनाने के लिए 2.9 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाएगा। इससे पता चलता है कि देश का कृषि कार्बन बाजार अब नीतियों के स्तर से खेतों के स्तर तक पहुंच गया है।

यहां जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति में यह जानकारी देते हुए बताया गया कि कार्बन क्रेडिट के तहत पहला भुगतान लुधियाना के पंजाब कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में गुरुवार को जारी किया गया। कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग (डेयर) सचिव और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट ने पंजाब और हरियाणा के 2550 किसानों को भुगतान करके इसकी शुरुआत की।

किसानों को यह भुगतान कई वर्षों तक चली माप और स्वतंत्र जांच की प्रक्रिया के बाद किया गया। कार्बन क्रेडिट जारी करने से पहले, ग्रीनहाउस गैसों में कमी और मिट्टी में कार्बन की मात्रा में बढ़ोतरी को मापा और सत्यापित किया गया। यह कार्यक्रम सात राज्यों में 20 लाख एकड़ से ज्यादा जमीन और एक लाख से अधिक किसानों को लेकर शुरू किया गया और कृषि कार्बन क्रेडिट जारी किए गए।

गौरतलब है कि ये भुगतान ग्रो इंडिगो का कार्बन प्रोग्राम, 'आदि' कार्यक्रम का हिस्सा हैं। इसे 2019 में आईसीएआर की तकनीकी मदद से शुरू किया गया था। इस प्रोग्राम के तहत, किसानों ने 2019 और 2022 के बीच सीधी बिजाई, कम जुताई और फसल के अवशेषों के प्रबंधन जैसे तरीके अपनाए।

यह कार्यक्रम पंजाब और हरियाणा में पुनर्योजी कृषि (मिट्टी की सेहत और जलवायु के प्रति बदलावों को सुधारने वाली खेती) की ओर बढ़ते बड़े बदलाव का हिस्सा है। इसमें खेती के ऐसे तरीके शामिल हैं, जिनसे मिट्टी की सेहत और जलवायु के प्रति सहनशीलता बेहतर हो सके। वर्ष 2019-2022 के दौरान आयोजित कार्यक्रमों से अनुमान निकाला गया है कि इससे 45 अरब लीटर पानी की बचत हुई और दो लाख टन से अधिक फसल अवशेषों को जलने से बचाया गया, जिससे अनुमानित 1,000 टन पीएम 2.5 उत्सर्जन को रोका जा सका।

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