अमरोहा , जुलाई 09 -- उत्तर प्रदेश के पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों में पिछले चौबीस घंटों से जारी मूसलाधार बारिश के चलते अमरोहा जिले में गुरुवार को गंगा नदी के तटीय इलाकों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए है। बिजनौर स्थित चौधरी चरण सिंह बैराज से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ता ही जा रहा है, जिसके चलते तटीय क्षेत्रों में स्थित किसानों के खेत और पुरोहितों की झोपड़ियां पूरी तरह जलमग्न हो गई हैं। जिला प्रशासन ने गुरुवार सुबह स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सभी बाढ़ चौकियों को चौबीसों घंटे स्थिति पर नज़र बनाए रखने के निर्देश किए हैं।पहाड़ी और मैदानी इलाकों में बुधवार और गुरुवार को भी लगातार जारी भारी वर्षा के कारण गंगा नदी के जलस्तर में 40 सेंटीमीटर से अधिक की बड़ी वृद्धि दर्ज की गई है, जिसके बाद मीटर गेज पर पानी का स्तर बढ़कर 199.65 मीटर तक पहुंच गया है।

बिजनौर बैराज से निरंतर पानी छोड़े जाने के चलते खादर क्षेत्र के गांवों में तेजी से पानी फैल रहा है, जिससे खड़ी फसलें जलमग्न होने की आशंका से ग्रामीण और किसान बेहद चिंतित हैं। बाढ़ खंड विभाग के अवर अभियंता सुभाष के मुताबिक इलाके में वर्षा की निरंतरता और बैराज से पानी छोड़े जाने के कारण स्थिति संवेदनशील बनी हुई है, जिसे देखते हुए सभी प्रभावित क्षेत्रों में मुस्तैदी और सुरक्षा के कड़े इंतजाम बढ़ा दिए गए हैं।

जल स्तर की इस अप्रत्याशित वृद्धि से मंडी धनौरा और गजरौला के निकटवर्ती तटीय गांवों का जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है, जहां वन महोत्सव के तहत पौधारोपण के लिए जा रहे मनरेगा श्रमिकों का हाल ही में एक ट्रैक्टर मुकारमपुर मार्ग पर सड़क पर आए पानी के तेज बहाव के कारण अनियंत्रित होकर पलट गया था। हालांकि, समय रहते रोजगार सेवक आसिफ, मजदूर हरपाल, रामपाल और असलम सहित चारों लोगों ने सूझबूझ से पानी से बाहर निकलकर अपनी जान बचाई, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।

आपदा प्रबंधन की टीमें भी लगातार प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।गुरुवार को बाढ़ के पानी के तेज बहाव के कारण शीशोंवाली मार्ग पर स्थित रामगंगा पोषक नहर के सामने बना मुख्य नाला और अस्थायी तटबंध अचानक टूट गया, जिससे भूड्डी वाली, मंदिर वाली और टीकोवाली गांवों का मुख्य संपर्क मार्ग पूरी तरह बह गया है। इस मुख्य मार्ग के टूटने से तीन गांवों की लगभग तीन हजार की आबादी का संपर्क मुख्य मार्गों से कट गया है और ग्रामीणों को आने-जाने के लिए अब केवल नावों का ही एकमात्र सहारा बचा है।

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