फिरोजाबाद , जुलाई 20 -- उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद शहर में सोमवार सुबह से हुई मूसलाधार बारिश ने नगर निगम और स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत जल निकासी एवं नाला सफाई पर किए गए दावों की पोल खोल दी। करीब पांच से छह घंटे तक हुई लगातार बारिश के बाद शहर के अनेक प्रमुख मार्गों और निचले इलाकों में गंभीर जलभराव हो गया, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित रहा।

बारिश के चलते शहर के मेडिकल कॉलेज अस्पताल की सर्विस रोड, रेलवे स्टेशन रोड, कंपनी बाग चौराहा, कोटला रोड, जलेसर रोड, हनुमानगंज, नगर निगम कार्यालय परिसर, चंदवार गेट, पेमेश्वर गेट सहित कई प्रमुख क्षेत्रों में सड़कों पर पानी भर गया। कई स्थानों पर जलभराव इतना अधिक था कि लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया और वाहन चालकों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

लगातार जलभराव के कारण शहर की यातायात व्यवस्था प्रभावित रही। कई इलाकों में सड़कें तालाब जैसी दिखाई देने लगीं। जलभराव की स्थिति को देखते हुए अधिकांश विद्यालयों ने विद्यार्थियों की सुरक्षा के मद्देनजर छुट्टी घोषित कर दी।

स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर निगम द्वारा प्रतिवर्ष नाला सफाई और जल निकासी व्यवस्था पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं। स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत भी शहर के बुनियादी ढांचे के विकास पर भारी धनराशि व्यय की जा रही है, लेकिन प्रत्येक वर्ष बारिश के दौरान हालात जस के तस बने रहते हैं। नागरिकों का आरोप है कि नालों की समय पर समुचित सफाई नहीं होने और जल निकासी तंत्र की खामियों के कारण थोड़ी देर की तेज बारिश भी शहर को जलमग्न कर देती है।

लोगों का कहना है कि नगर पालिका से नगर निगम और फिर स्मार्ट सिटी का दर्जा मिलने के बावजूद बुनियादी सुविधाओं में अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं देता। दूसरी ओर नागरिकों पर करों का अतिरिक्त बोझ बढ़ा है, लेकिन जलभराव जैसी मूलभूत समस्याओं का स्थायी समाधान अब तक नहीं हो सका है।

बारिश के बाद उत्पन्न हालात ने एक बार फिर शहर की जल निकासी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय नागरिकों ने नगर निगम से नालों की नियमित सफाई, जल निकासी तंत्र को सुदृढ़ करने तथा जलभराव वाले क्षेत्रों में स्थायी समाधान सुनिश्चित करने की मांग की है।

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